Tiger: How the tiger attacked a woman and her daughter (version 2)


Continuous playing:

Transcription by sentence
Other

Translation by sentence
fr
Whole text transcription


Whole text translation
fr



Notes
ə˧ʝi˧-ʂɯ˥ʝi˩, | hĩ˧ | ɖɯ˧-ʑi˩-ɻ̍˩-ʈʂʰɯ˩, ◊ ə˩-gi˩! | tʰi˩˥, | əəə… zo˩no˥… | ʈʂʰɯ˧ne˧-ʝi˥ | pi˧-ɲi˥-kv̩˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩:
zo˩no˥, | lɑ˧, | ʐæ˩˥, | pi˧-hĩ˧-ʈʂʰɯ˧-dʑo˩, | zo˩no˥, | hĩ˧ ʈʰæ˩, | ʈʂʰɯ˧-dʑo˩, ◊ ə˩-gi˩! |
zo˩no˥, | mɤ˧-ni˩~ni˩-hĩ˩, | zo˩no˥, | ʈʂʰæ˩~ʈʂʰæ˩-qo˥, | zo˩no˥, | kwɤ˧wɤ˧ mɤ˧-ɲi˥-dʑo˩, | ʈʰæ˧-mɤ˥-kv̩˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!
tʰi˩˥, | æ˧ʂæ˧-ʈʂʰɯ˧, | ʈʂʰɯ˧ne˧-ʝi˥ | pi˧-kv̩˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩:
"ʐæ˩ do˥, | ə˧mi˧ ʂɯ˧! | lɑ˧ do˩, | ə˧dɑ˧ ʂɯ˧!" | pi˧-kv̩˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |
tʰi˩˥, | "lɑ˧ do˩, | ə˧dɑ˧ ʂɯ˧!" | pi˧-hĩ˧-ʈʂʰɯ˧-dʑo˩ | tʰi˩˥, | ə˧ʝi˧-ʂɯ˥ʝi˩, | zo˩no˥, | dʑɯ˩ʁo˩-ʈʂʰɯ˥, | zo˧ ɖɯ˧-v̩˧-ʈʂʰɯ˧, | dʑɯ˩nɑ˩mi˩ʁo˩ hɯ˩-ɲi˥-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!
dʑɯ˩nɑ˩mi˩ʁo˩ hɯ˩˥ ◊ -dʑo˩, | lɑ˧ ɖɯ˧-pʰo˧ do˧-tsɯ˥ ◊ -mv̩˩! |
tʰi˩˥, | lɑ˧ ɖɯ˧-pʰo˧ do˧˥ ◊ -dʑo˩ | tʰi˩˥, | ɑ˩ʁo˧ le˧-hɯ˩-dʑo˩, |
əəə… "ə˧dɑ˧! | ə˧tse˧ ʝi˧-ɲi˥? | njɤ˧ | tsʰi˧-ɲi˧ | dʑɯ˩ʁo˩˥ | tʰv̩˧-qo˧ | lɑ˧ ɖɯ˧-pʰo˧ do˧-zo˥! | njɤ˧ | le˧-ɖwæ˩-zo˩, | le˧-pʰo˩, | le˧-pʰo˩, | le˧-pʰo˩-zo˩!" |
"<õ˧-bv̩˥-õ˩…> [õ˧-so˥-ɳɯ˩, | õ˧ ɖwæ˥!] | õ˧-ɬi˧qʰv̩˧-ɳɯ˩, | õ˧-so˥-ɳɯ˩, | õ˧ gɤ˥!" | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. õ˧˥ | hhh… hhh… hhhɑ̃! pi˧-hĩ˧-tʰv̩˧-ɳɯ˩, | õ˧˥ | le˧-ɖwæ˩, | le˧-ʂɯ˧-ho˧-ze˩! | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |
tʰi˩˥, | ə˧dɑ˥-ɳɯ˩ | ʈʂʰɯ˧ne˧-ʝi˥ | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩:
"mɤ˧-dɑ˩! | njɤ˧ zo˧! F | ə˩zɯ˩˥… | ʈʂʰɯ˧-dʑo˩, | æ˧ʂæ˧-tɑ˩mv̩˩-dʑo˩ | dʑo˧-ɲi˥-mæ˩!" |
" '<ʐæ˩ d…> lɑ˧ do˩, | ə˧dɑ˧ ʂɯ˧! | ʐæ˩ do˥, | ə˧mi˧ ʂɯ˧!' | pi˧!" |
tsʰi˧ʝi˧-dʑo˩ | tʰi˩˥, | no˧ | ɖɯ˧-pi˧˥ | mɤ˧-dʑɤ˩-ɲi˩! |
"ə˩zɯ˩˥, | ə˧dɑ˧ ʂɯ˧-ho˥-ɲi˩!" |
"no˧ | ɖwæ˩-mɤ˧-zo˧!" | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |
"no˧ | ə˧tso˧ ɖwæ˩? | ə˩zɯ˩˥, | hĩ˧-dʑo˩, | le˧-mo˩ | le˧-ʂɯ˧-kv̩˧˥!" |
"ə˧dɑ˥ | ɖɯ˧-zɯ˧ | no˧-sɯ˩kv̩˩ | zɯ˧ pv̩˩-mɤ˩-ʝi˩!" | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |
tʰi˩˥, | zo˧-ɳɯ˩: | "ə˧dɑ˥! | no˧ | le˧-ʂɯ˧-se˥, | njæ˧sɯ˩kv̩˩ | hɑ˧ F | dzɯ˧ mɤ˧-ʝi˧! | qʰɑ˩ne˩ ʝi˥-bi˩?" |
"njæ˧sɯ˩kv̩˩, | ɖɯ˧-v̩˧ | ɖɯ˧-sɑ˥ F | mɤ˧-sɯ˥!" | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |
tʰi˩˥, | ə˧dɑ˥-ɳɯ˩: | "ejo! mɤ˧-sɯ˥-dʑo˩, | ɖwæ˩-mɤ˧-zo˧!" |
"əəə… ʁwɤ˧-qo˧ dzi˩-ɲi˩! | fv̩˩-ɳɯ˥ | <p…> kɯ˩-kv̩˥! | bi˧-ɳɯ˧ | kɯ˩-kv̩˥!" |
hĩ˧-ɳɯ˩ | hĩ˧ so˥ | le˧-po˧-jo˥ ◊ -dʑo˩, | ʁwɤ˧[-qo˧]-ɳɯ˧ | so˩-kv̩˩˥! | no˧-sɯ˩kv̩˩, | ɖwæ˩-mɤ˧-zo˧!" | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |
əəə, tʰi˩˥… | ĩ˧!
tʰi˩˥, | "ʈʂʰæ˩~ʈʂʰæ˩˥ | kɤ˧wɤ˧ ljɤ˧-qo˥-ɳɯ˩ | le˧-tsʰɯ˩, | ə˧dɑ˥ | le˧-ʂɯ˧-bi˧, | ə˩zɯ˩˥ | pæ˧˥hwɤ˧ mɤ˧-dʑo˧-ze˧!" |
"ə˧dɑ˧-ə˧mi˧-dʑo˩, | zo˧mv̩˥ | zɯ˧ pv̩˩-hĩ˩ | mɤ˧-dʑo˩-ɲi˩!" | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |
tʰi˩˥, | ʈʂʰɯ˧ne˧ ʝi˥-dʑo˩, | tʰi˩˥, | ɖɯ˧-ɲi˧-ɻ̍˧-dʑo˩, | mv̩˩-lɑ˥, | zo˩no˥, | mv̩˩-ʈʂʰɯ˥, | zo˩no˥, | ɖɯ˧-di˩ ki˩-ɲi˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |
zo˩no˥, | mv̩˩-ʈʂʰɯ˥, | ɬi˧di˩ ki˩! |
ə˧mi˧-ʈʂʰɯ˧ | tʰi˩˥, | mmm… <ʐv̩˧di˧ dʑo˧˥ | ɖɯ˧-ʝi˧ ɲi˩-ze˩-mæ˩> [ʐv̩˧di˧-ni˧˥ | ɖɯ˧-ʝi˧-qo˧ | dʑo˧-ɲi˧-ho˥-ze˩-mæ˩], ◊ ə˩-gi˩! | dʑɯ˩ʁo˩-ʁo˩to˥ | <ɖɯ˩-tɕo˧ fæ˧-hĩ˧ | ɖɯ˧-ʝi˧-qo˧ | dʑo˩-ɲi˩-ho˥-ze˩-mæ˩> [dv̩˩tɕo˧ fæ˧ ɖɯ˧-ʝi˧-qo˧ | dʑo˩-ɲi˩-ho˥-ze˩-mæ˩]! |
ʐv̩˧di˧-ki˥ ɲi˩-kv̩˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩! |
ʐv̩˧di˧-pi˥-kv̩˩-ze˩, | njæ˧sɯ˩kv̩˩-dʑo˩, | nɑ˩-dʑo˥! |
ɬi˧di˩, | ʐv̩˧di˧ pi˥! | tʰi˩˥… |
tʰv̩˧qo˧-ki˧ ◊ -dʑo˩ | tʰi˩˥, | mv̩˩˥ ◊ -dʑo˩ | tʰi˩˥, | ɖɯ˧-hɑ̃˧˥ ◊ -dʑo˩, | le˧-bi˩, | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |
ɑ˩ʁo˧ | ə˧ʑi˧-lɑ˥ | ə˧pʰv̩˧-ki˧ | le˧-bi˩, | pi˧, | mv̩˩zo˩˥ | æ˧mv̩˥-tɕi˩-hĩ˩, | ə˧mi˧-mv̩˩ | tʰi˧-ki˧-hĩ˧ | tʰv̩˧-v̩˧-ɳɯ˩. |
tʰi˩˥, | "njɤ˧-mv̩˩! | ə˩zɯ˩˥, | ɖɯ˧-ʈʂæ˧˥ | le˧-mɤ˧-kʰi˧-ze˥!" |
mmm… "<ə˧mi˧-lɑ˧… əəə…> ə˧ʑi˧-lɑ˥ | ə˧pʰv̩˧-ki˧ | le˧-bi˩-zo˩-ho˩ F -di˩!" | pi˧ ◊ -dʑo˩ | tʰi˩˥, |
tʰi˩˥, | "bi˧-tsæ˧-ɲi˩!" | pi˧ | tʰi˩˥, | ʈʂʰɯ˧ | pʰæ˧tɕi˥ | ʈʂʰɯ˧-v̩˧-ɳɯ˩: |
tʰi˩˥, | "no˧zɯ˩… no˩zɯ˧-tɑ˧kɤ˥ | bi˧-tʰɑ˧-ʝi˥! | <ɖwæ… əəə…> se˧-ʁo˧-ʝi˥!" | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |
tʰi˩˥, | ʐɤ˩mi˩-qo˥, | hĩ˧ ɲi˥-kv̩˩ ʁo˩-pv̩˩-dʑo˩. |
"ɖwæ˩-mɤ˧-zo˧-wɤ˧! | njɤ˧ F | ʈʰææ̃˧ | se˧-ɲi˥!" | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |
"njɤ˧ F | ʈʰææ̃˧ | le˧-kʰi˧˥ ◊ -ɲi˩, | se˧-ɲi˥, | ɖwæ˩-mɤ˧-zo˧!" | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |
tʰi˩˥, | kʰi˧˥! | tʰi˧-se˥, | tʰi˧-se˥, | tʰi˧-se˥ ◊ -dʑo˩, | ʐɤ˩mi˩-qo˥ | ɖɯ˧-hɑ̃˧ tʰi˥-hɑ̃˩-ɳɯ˩, | ɑ˩ʁo˧ tʰv̩˧-ɲi˥-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |
tʰi˩˥, | ə˧ʝi˧-ʂɯ˥ʝi˩-dʑo˩, | mv̩˩sɯ˧-njɤ˧˥, | tv̩˧tsʰɯ˧ hõ˧-ɭɯ˥ | bi˧-dʑo˩ | tʰi˩˥, | bv̩˩hwɤ˩-pi˥-zo˩! |
dʑɯ˩nɑ˩mi˩ʁo˩˥ ◊ -dʑo˩, | ʑi˧qʰwɤ˧ | mɤ˧-di˩-ɲi˩-mæ˩! |
bv̩˩hwɤ˩-pi˥-zo˩ | tʰi˩˥, | <lo˧, əəə…> bv̩˩lv̩˩-hĩ˥-ɳɯ˩ | ʑi˧qʰwɤ˧ le˧-dɑ˧˥, | tʰi˧-dzi˩ | əəə… -dʑo˩! | bv̩˩lv̩˩-hĩ˥ | ʈʂʰɯ˧-dʑo˩ | tʰi˩˥, | əəə… mv̩˧ʐe˧-qo˥, | so˧ɬi˧-qʰv̩˧ɬi˥-dʑo˩, | mv̩˧ʈʰæ˧! | ɖɯ˧-pi˧˥ | mv̩˧ʈʰæ˧ ʂe˧~ʂe˧ | lv̩˩-ʝi˥-kv̩˩-mæ˩! | zɯ˧ tʰi˧-di˧! |
mv̩˧tsʰi˧-qo˩ | qʰv̩˧-ɬi˧-dʑo˩, | gɤ˧bi˧ bi˧-kv̩˩-ze˩-mæ˩! |
tʰi˩˥, | ʈʂʰɯ˧ne˧ ʝi˥-kwɤ˩tɕɯ˩-lɑ˩ | tʰi˩˥, | mmm… gɤ˧bi˧ hɯ˧-hĩ˧ | mv̩˧tsʰi˧-qo˩ | le˧-hɯ˩ ◊ -dʑo˩ | tʰi˩˥, | <ɖʐo˧-hĩ˧… |> gɤ˧bi˧ | ɖʐo˧-hĩ˧ ʈʂʰɯ˧-ʈʂæ˩-qo˩ | le˧-hɯ˩-dʑo˩, | bv̩˩hwɤ˩˥ | ɖɯ˧-ɭɯ˧-qo˧ hɑ̃˧-tsɯ˥ ◊ -mv̩˩! |
tʰi˩˥, | bv̩˩hwɤ˩˥ | ɖɯ˧-ɭɯ˧-qo˧ tʰi˧-hɑ̃˧˥, | tʰi˧-hɑ̃˧˥ ◊ -dʑo˩, | tʰi˧-hɑ̃˧˥, | mv̩˩zo˩-lɑ˥ | ɲi˧-kv̩˧˥ | tʰi˩˥, | əəə… ɑ˩ʁo˧ | tʰi˩˥, | hɑ˧… hɑ˧… hɑ˧ F -qɑ˩ | tʰi˩˥, | <gv…> v̩˧ F | mɤ˧-po˧˥! |
hɑ˧ | <le… bv… le…> [ɑ˩ʁo˧ | õ˧-bv̩˥-õ˩] le˧-gv̩˩-hĩ˩ | ɖɯ˧-kʰwɤ˥ po˩, ◊ ə˩-gi˩! |
"ʐɤ˩mi˩-qo˥… | ə˩zɯ˩˥ | tsʰo˧qʰwɤ˩-dʑo˩ | bv̩˩hwɤ˩-qo˥ hɑ̃˩ ◊ -dʑo˩, | mv̩˧ | ɖɯ˧-æ˩ | tʰi˧-kʰɯ˩! | tʰv̩˧-kʰwɤ˧ bv̩˧, | dzɯ˧-tsæ˧-ɲi˩!" | pi˧-zo˩ | tʰi˩˥, |
mmm… <dʑɯ˧ | ɖɯ˧-ɭ… əəə… dʑ…> dʑɯ˧ | ɖɯ˧-qʰv̩˧tʰv̩˧ tʰi˩-kʰɯ˩! |
əəə… hɑ˧ | ʝi˧kʰwɤ˥ tʰi˩-kʰɯ˩! | ʂe˧ | ɖɯ˧-kʰwɤ˥ tʰi˩-kʰɯ˩! |
tʰi˩˥, | mv̩˩-lɑ˥ | ʈʂʰɯ˧zɯ˩-dʑo˩, | mv̩˩kʰv̩˧˥ | nɑ˩dzi˧; |
nɑ˩dzi˧-kwɤ˩tɕɯ˩-lɑ˩ | tʰi˩˥, | bv̩˩hwɤ˩-qo˥ tʰv̩˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!
bv̩˩hwɤ˩-qo˥ | tʰv̩˧ ◊ -dʑo˩ | tʰi˩˥, | ʂe˧ tʰv̩˧-kʰwɤ˧ | tʰi˧-bv̩˥-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!
tʰi˩˥, | ʂe˧ tʰv̩˧-kʰwɤ˧ | tʰi˧-bv̩˥, | mv̩˩zo˩-lɑ˥ | ə˧mi˧-dʑo˥, | mv̩˧ | ɖɯ˧-æ˩ tʰi˩-kʰɯ˩, | ʂe˧ | tʰi˧-bv̩˥ ◊ -dʑo˩ | tʰi˩˥, | <v…> lɑ˧-ʈʂʰɯ˧-ɳɯ˩-dʑo˩, | ʂe˧, | əəə… bv̩˧nv̩˧-tsɯ˥ ◊ -mv̩˩, | ɲi˧qʰv̩˧-qo˧ | bv̩˧nv̩˧-zo˩! |
bv̩˧nv̩˧-dʑo˧ | tʰi˩˥, | tɑ˧~tɑ˧ | ʈʂʰɯ˧zɯ˩ | ʂe˧-lɑ˩ | hɑ˧ | le˧-dzɯ˧-se˥-dʑo˩, | bv̩˧nv̩˧-zo˩ | tʰi˩˥, | lo˧qo˧-dʑo˩, | põ! põ pi˧, | tʰi˧-ɖwæ˧˥ ◊ -dʑo˩-pi˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. | lɑ˧-mæ˧qv̩˩-ʈʂʰɯ˩-ɳɯ˩! |
lɑ˧-mæ˧qv̩˩-ʈʂʰɯ˩-ɳɯ˩ | põ! põ! pi˧ | le˧-ɖwæ˧˥ ◊ -dʑo˩ | tʰi˩˥, | si˧dzi˩ tʰv̩˩ | tsi˩qwæ˩-tsi˧qwæ˧! pi˧, | qʰæ˧~qʰæ˧-tsɯ˧˥ ◊ -mv̩˩! |
tʰi˩˥, | ə˧ʝi˧-ʂɯ˥ʝi˩ | tʰi˩˥, | mv̩˩zo˩-ə˩mi˥-ʈʂʰɯ˩-ɳɯ˩ ◊ -dʑo˩, | tʰv̩˧, | ə˧si˧-ɳɯ˧ | ʈʂʰɯ˧ne˧-ʝi˥ | ʐwɤ˩-kv̩˩-pi˥-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |
"ə˧mi˧! | lɑ˧-ʈʂʰɯ˧ | hĩ˧ ʈʰæ˩-ho˩-pi˩, | mæ˧qv̩˩-sɯ˩ | ɖwæ˧-kv̩˥!" | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |
tʰi˩˥, | əəə… zo˩no˥, | əəə… zo˩no˥, | əəə… "hĩ˧ ʈʰæ˩<-qo˩>-ho˩ ◊ -dʑo˩, | mæ˧qv̩˩-sɯ˩ | ɖwæ˧-kv̩˥-tsɯ˩! | njɤ˧ mv̩˩! | ə˧zɯ˩ | tsʰo˧qʰwɤ˩-se˩, | lɑ˧-ɳɯ˧ dzɯ˧-ho˥ F -di˩-mæ˩!" | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |
tʰi˩˥, | mv̩˩-ɳɯ˥: | "ə˧mɑ˧! mɤ˧-ʝi˧-wɤ˧! | ʁɑ˩mi˧! | lɑ˧… | ə˧zɯ˩, | lɑ˧-dʑo˧, | hĩ˧=ɻæ˥, | dʑɯ˩ʁo˩˥ | gɤ˧ | gv̩˩pʰæ˩ tɕɯ˥-hĩ˩ | hĩ˧ tsʰɯ˧˥ | bɑ˩˥! | hĩ˧ | ʝi˧-kʰv̩˧ tsʰɯ˧˥ | bɑ˩˥! |
"kɤ˩-tjɤ˧ ljɤ˧ lɑ˩-hĩ˩-ni˩-gv̩˩!" | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |
lɑ˧-ʈʂʰɯ˧-dʑo˩, | ʈʂʰɯ˧ne˧ ʝi˥-kv̩˩-mæ˩, | hĩ˧ ʈʰæ˩-ho˩! |
kɤ˩-tjɤ˧ljɤ˧-ni˧˥, | ki.li-kõ.lõ-kõ.lõ! pi˧, | wɤ˩˥ | ɖɯ˧-bæ˧ lɑ˧-ʝi˥! |
əəə… | tse˧bo˧ lɑ˩, | ɖɯ˧-ʂɯ˩ tʰi˩-lɑ˩! | kjɤ˩-tjɤ˧ljɤ˧ lɑ˩, | ɖɯ˧-ʂɯ˩ tʰi˩-lɑ˩! |
mæ˧qv̩˩ ɖwæ˩, | si˧dzi˩ qʰæ˩~qʰæ˩-kv̩˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!
tʰi˩˥, | mv̩˩zo˩˥ ◊ -dʑo˩, | "ʐwæ˧ ɲi˥ F -di˩! | ʐwæ˧ ʝi˧kʰv̩˧ tse˧bo˧ lɑ˩-dʑo˩!" | pi˧, | mv̩˩-ɳɯ˥! | ə˧mi˧ ʈʂʰɯ˧-v̩˧-dʑo˩, | ɖɯ˧-pi˧˥ | sɯ˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!
ə˧ʝi˧-ʂɯ˥ʝi˩, | hĩ˧ mo˥-hĩ˩ | ʐwɤ˩-dʑɯ˩-tsɯ˥ ◊ -mv̩˩!
"mɤ˧-ʝi˧, | mɤ˧-ʝi˧! | njɤ˧ mv̩˩! | mɤ˧-ʝi˧-ze˧! | tsʰo˧qʰwɤ˥-dʑo˩, | ə˧zɯ˩-dʑo˩, | gi˩˥, | lɑ˧-ɳɯ˧ | dzɯ˧-ho˥-ze˩! | ə˩zɯ˩˥, | ə˧ʑi˧-lɑ˥ | ə˧pʰv̩˧ | do˩-mɤ˩-ho˥ F di˩! | lɑ˧-ɳɯ˧ | dzɯ˧-ho˥-ze˩!" | pi˧-dʑo˩, | mv̩˩-ɳɯ˥: |
"mɤ˧-ʝi˧! | ə˧mɑ˧, | no˧, əəə… | ə˧tso˧ ʐwɤ˩-ɲi˩?" | pi˧. | "mɤ˧-ʝi˧! | mɤ˧-ʝi˧! | ə˧zɯ˩ | kʰi˧ <le˧->[tʰi˧-]tv̩˧˥!" | pi˧-dʑo˩, | kʰi˧ tv̩˩-ɲi˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |
kʰi˧ | tʰi˧-tv̩˧˥ ◊ -dʑo˩, | lɑ˧-ɳɯ˧ | zɯ.bv-zɯ.bv! pi˧, | mi˧-le˧-tsʰɯ˧-ɲi˥-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |
<mv…> mi˧-le˧-tsʰɯ˧˥ ◊ -dʑo˩ | tʰi˩˥, | <mv…> mv̩˩-ɳɯ˥: | "ə˧mɑ˧! | ə˧zɯ˩ | qʰɑ˩ne˩ ʝi˥-bi˩?" | pi˧. | ə˧mi˧-ɳɯ˧: | "no˧ | ʁo˧tʰo˩ hĩ˩! | no˧ | ʁo˧tʰo˩ hĩ˩!
"ə˧mɑ˧ | ʁo˧dɑ˧ hĩ˧-bi˥, | no˧ | ʁo˧tʰo˩ hĩ˩!" | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |
mv̩˩-ɳɯ˥: | "mɤ˧-bi˧! | ə˧mɑ˧, | ə˧zɯ˩ | ↑ɲi˧-kv̩˧˥ F | kɤ˧kɤ˩ | tʰi˧-hĩ˧-bi˧!" | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |
tʰi˩˥, | kɤ˧kɤ˩ | tʰi˧-hĩ˧-bi˧-pi˧-dʑo˩, | tʰi˩˥, | <mv̩˩˥…> ə˧mi˧-ɳɯ˧ | mv̩˩˥ | le˧-pʰæ˧˥, | ʁo˧tʰo˩ kwɤ˩-zo˩, | əəə… ə˧mi˧ | ʁo˧dɑ˧ hĩ˧-tsɯ˥ ◊ -mv̩˩. |
tʰi˩˥, | ə˧mi˧, | lɑ˧-ɳɯ˧ | le˧-ʈʰæ˧-ɲi˥-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!
lɑ˧-ɳɯ˧ | ɖɯ˧-ʈɤ˧-ɳɯ˧ | le˧-ʈɤ˧-po˧-hɯ˥-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!
tʰi˩˥, | le˧-ʈɤ˧-po˧-hɯ˥, | le˧-ʈʰæ˧˥ ◊ -dʑo˩, | tʰi˩˥, | le˧-ʈɤ˧, | ɑ˩pʰo˩ po˥-hɯ˩, | kʰi˧ | tʰi˧-dzɤ˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!
kʰi˧ | tʰi˧-dzɤ˩; | mv̩˩˥ ◊ -dʑo˩ | tʰi˩˥, | le˧-ɖwæ˩-zo˩! | <z… əəə… no˧…>
əəə… ʈʂʰɯ˧-ʈʂæ˧-qo˩, | mv̩˩˥ | ɖwæ˧˥ | mɤ˧-ɖwæ˩-ze˩-pi˩-tsɯ˩. |
"ə˧mi˧ F | lɑ˧ le˧-ʈʰæ˧-ze˥; | njɤ˧ F | tʰi˧-ʈʰæ˧-kʰɯ˥!" |
"zo˩no˥ | … hĩ˧ F | le˧-ʂɯ˧, | ɖɯ˧-tɑ˧˥ | ʂɯ˧-tso˧-lɑ˩ ɲi˩! | ə˧mi˧ F | le˧-ʂɯ˧, | njɤ˧ F | ʂɯ˧-tso˧-lɑ˩ ɲi˩!" | pi˧. |
lɑ˧… | lɑ˧-lɑ˧, | ə˧mi˧-gi˧˥, | pʰo˩-ɲi˥-pi˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩! | lɑ˧-ɳɯ˧ | ə˧mi˧ | ʐɯ˩-ɳɯ˥ | ʐɯ˩-pi˥ | ʈɤ˧! | mv̩˩˥ | <pʰo˩… hõ… qʰɑ˩ne˩˥…>[qʰɑ˩ne˩˥ | pʰo˩-ɲi˥-pi˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!]
lɑ˧ | qʰɑ˩ne˩˥ | bæ˧˥! | <ə˧mi˧-lɑ˧ | mv̩˩˥, | əəə…> mv̩˩˥ | ʈʂʰɯ˧ne˧-ʝi˥ | bæ˧-ɲi˥-pi˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!
lɑ˧-ʈʂʰɯ˧-ɳɯ˩, | ə˧mi˧-ʁæ˧ʈv̩˥ | tʰi˧-ʈʰæ˧˥ ◊ -tɕɯ˩-zo˩, | ɖɯ˧-ʈɤ˧, | ɖɯ˧-ʈɤ˧, | ɖɯ˧-ʈɤ˧-ɳɯ˧ | po˧-hɯ˥! |
lo˧qo˧-mv̩˧ | po˧-hɯ˥! | mv̩˩˥ F | lo˧qo˧ kʰi˧-ɲi˥-pi˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!
lo˧qo˧ kʰi˧˥ ◊ -dʑo˩, | tʰi˩˥, | qʰɑ˩ne˩ ʝi˥-zo˩ | qʰɑ˩ne˩˥ | gɤ˩-tʰv̩˧, | mɤ˧-do˩-zo˩! | mv̩˩˥, | le˧-ŋv̩˩, | le˧-ŋv̩˩, | le˧-ŋv̩˩-dʑo˩-tsɯ˩! |
le˧-wo˧-tʰo˥-tɕo˩, | ə˧mi˧-ɳɯ˧, | əəə… ʐwɤ˩-ni˩˥ ◊ -zo˩: | "njɤ˧ mv̩˩! | no˧ | le˧-wo˧-hõ˧ F ! | no˧ | ŋv̩˩-mɤ˩-zo˩˥!" | pi˧-ni˩-zo˩. |
le˧-wo˧-tʰo˥-tɕo˩-tɕɯ˩-dʑo˩, | gɤ˧bi˧ | qo˩qɑ˩˥ | ɖɯ˧-ɭɯ˧-qo˧ tʰv̩˧ | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |
tʰi˩˥, | qo˩qɑ˩˥ | ɖɯ˧-ɭɯ˧-qo˧ tʰv̩˧-dʑo˧, | tʰi˧-hĩ˧-zo˥! | "ə˧mi˧! | njɤ˧-ə˧mɑ˧! | njɤ˧ | qʰɑ˩ne˩˥ | ɖɯ˧-zɯ˧ bv̩˩-ʝi˩?" |
əəə… no˧ | lɑ˧ | le˧-tsʰɯ˩; | no˧… <l… ə˧zɯ˩…> lɑ˧ | le˧-ʈʰæ˧-po˥-hɯ˩-ze˩! |
"njɤ˧ | qʰɑ˩ne˩ ʝi˥-kʰɯ˩-bi˩?"
"njɤ˧ | ə˧ʑi˧-lɑ˥ | ə˧pʰv̩˧-ki˧ | qʰɑ˩ne˩˥ | tʰi˧-ʐwɤ˩-bi˩?"
"no˧ | njɤ˧ le˧-ʂv̩˧-jo˧!" | pi˧-zo˩, | mv̩˩zo˩-ɳɯ˥ | ɖɯ˧-njɤ˧ | ŋv̩˩-ɲi˥-pi˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!
le˧-ŋv̩˩, | le˧-ŋv̩˩-dʑo˩ | tʰi˩˥, | le˧-ŋv̩˩-se˩-dʑo˩, | mv̩˩zo˩˥ | tʰi˧-ʑi˧-ze˥-pi˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!
tʰi˧-ʑi˧ŋv̩˥-dʑo˩, | ə˧tso˧, | ɖɯ˧-v̩˧-ɳɯ˧ | gɤ˩-tɕʰɯ˧-ni˧˥ ◊ -zo˩, | tʰi˩˥, | ə˧mi˧-qv̩˧ʈʂæ˧ mv̩˥ | le˧-po˧-tsʰɯ˧-zo˥; | ə˧mi˧-ɳɯ˧: |
"njɤ˧ mv̩˩! | no˧ | ə˧ʑi˧-lɑ˥ | ə˧pʰv̩˧-ki˧ | le-bi˩-tsæ˩-ɲi˩! | ɖwæ˩-mɤ˧-zo˧-wɤ˧!" | pi˧-ni˩-zo˩, |
<gɤ˩-tɕʰɯ˧-dʑo˩…> gɤ˩-ʈi˧, | gɤ˩-ʈʂʰwæ˧-tɕɯ˥-dʑo˩-tsɯ˩, | ə˧mi˧ | ɖɯ˧-do˩-ki˩-zo˩! |
tʰi˩˥, | əəə… ə˧mi˧ | ɖɯ˧-do˩-ki˩-dʑo˩ | tʰi˩˥, | wɤ˩˥, | ə˧mi˧ | le˧-tɕʰɯ˧˥ ◊ -tɕɯ˩-hɯ˩-zo˩! |
tʰi˩˥, | mv̩˩˥ | le˧-ŋv̩˩, | le˧-ŋv̩˩ | le˧-kʰi˧˥ ◊ -dʑo˩, | ʐɤ˩mi˩-qo˥ | ɖɯ˧-v̩˧ ʁo˧pv̩˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!
"no˧ | ə˧tse˧-ʝi˧ | ŋv̩˩-ɲi˥? | ɲi˩˥ | mv̩˩zo˩ ɲi˥? | ə˧tse˧-ʝi˧-ɲi˥ | no˧-tɑ˧kɤ˥ | le˧-tsʰɯ˩?" |
"dʑɯ˩nɑ˩mi˩˥ | ʈʂʰɯ˧-ʂwæ˧~ʂwæ˧-hĩ˧-qo˩, | ə˧tse˧ ʝi˧ | no˧-tɑ˧kɤ˥ | se˧-ɲi˥?" | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |
tʰi˩˥, | ʈʂʰɯ˧-v̩˧-bi˥ | tʰi˧-tv̩˧~tv̩˧-zo˥: |
"ə˧v̩˧˥ F ! | njɤ˧, əəə… | ə˧mɑ˧, | njɤ˧zɯ˩-dʑo˩, | ə˧ʑi˧-lɑ˥ | ə˧pʰv̩˧-ki˧ | le˧-bi˩-pi˩, | le˧-tsʰɯ˩-dʑo˩;" |
"ə˧hwɤ˧, | lɑ˧-ɳɯ˧ | njɤ˧ ə˧mɑ˧ | le˧-ʈʰæ˧-ze˥!" |
"əəə… njɤ˧ F | ɖɯ˧-ʈʰæ˧-pi˥, | lɑ˧-gi˧˥ | le˧-bæ˧˥ ◊ -kʰi˩! | njɤ˧ | mɤ˧-ʈʰæ˧˥!" |
"njɤ˧ | ə˧mɑ˧ | le˧-ʈʰæ˧-po˧-hɯ˥-ze˩!" | pi˧-zo˩, | ŋv̩˩-ɲi˥-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!
ŋv̩˩˥, | ŋv̩˩-dʑo˥ | tʰi˩˥, | əəə… zo˩no˥, | əəə… pʰæ˧tɕi˥ tʰv̩˩-v̩˩ | ʁo˧pv̩˩, ə˧v̩˧ tʰv̩˧-v̩˧-ɳɯ˩: |
"mv̩˩zo˩˥! | no˧ | ɖwæ˩-mɤ˧-zo˧-wɤ˧! | æ˧ʂæ˧-tɑ˩mv̩˩ | dʑo˧-ɲi˥!" |
"əəə… 'lɑ˧ do˩, ə˩dɑ˩ ʂɯ˩! | ʐæ˩ do˥, ə˩mi˩ ʂɯ˩!' | pi˧. |
"ʐæ˩˥ ◊ -dʑo˩, | ə˧mi˧ ʈʰæ˧-kv̩˥! | lɑ˧-dʑo˧, | ə˧dɑ˥ ʈʰæ˩-kv̩˩! | no˧ | ɖwæ˩-mɤ˧-zo˧!" |
"<no˧… | ə˧zɯ˩…> | hĩ˧-ʈʂʰɯ˧-dʑo˩, | ə˧dɑ˧-ə˧mi˧, | no˧-sɯ˩kv̩˩ | zɯ˧ pv̩˩-mɤ˩-kv̩˩!" |
no˧ | ə˧mi˧-ʈʂʰɯ˧-dʑo˩, | ʈʂʰæ˩~ʈʂʰæ˩-qo˥-ɳɯ˩, | zo˩no˥… | lɑ˧-ɳɯ˧ | <ʈʂʰæ˧-zo˥> ʈʰæ˧-zo˧-ʝi˧-zo˥, | zo˩no˥, | hĩ˧-ʈʂʰɯ˧, | əəə… <le˧-dʑo˩-ɲi˩-ʝi˩> [dʑo˧-hĩ˧ ɲi˥-ʝi˩]! |
"tɕi˧wɤ˧-ɳɯ˩, | ʈʂʰɯ˧ne˧ gv̩˧-ɲi˥-ʝi˩!" |
"no˧ | ə˧mi˧-ki˧ | se˧pʰɤ˧ ʝi˧-mɤ˧-zo˧-ze˩!" |
"no˧˥ | tʰv̩˧-se˩-gɤ˩ | no˧ | ə˧mi˧-ɳɯ˧ | tʰi˧-ʁo˥ʐv̩˩-dʑo˩-ʝi˩!" |
"no˧ | õ˧-bv̩˥-õ˩ | ə˧ʑi˧-lɑ˥ | ə˧pʰv̩˧-ki˧ | le˧-hõ˩!" | pi˧-zo˩ | tʰi˩˥, | əəə… le˧-hɯ˩-ɲi˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!
le˧-hɯ˩-dʑo˩ | tʰi˩˥, | ɑ˩ʁo˧ tʰi˧-tʰv̩˧-dʑo˧, | ə˧pʰv̩˧-lɑ˧ | ə˧ʑi˧-ki˥ | ʈʂʰɯ˧ne˧-ʝi˥ | le˧-ʐwɤ˩, | le˧-ʐwɤ˩, | le˧-ʐwɤ˩-dʑo˩, | ə˧ʑi˧-lɑ˥ | ə˧pʰv̩˧-ɳɯ˧: |
"<njɤ˧…> | njɤ˧ mv̩˩-ɲi˩! | njɤ˧ | ŋv̩˩˥ | mɤ˧-bi˧-ze˧!" |
"njɤ˧ kwɤ˧ɭɯ˩! | njɤ˧ ʐv̩˧mi˧! | no˧ | ɖwæ˩-mɤ˧-zo˧!" |
"ə˧mi˧ ʈʰæ˧˥, | tʰi˧-ʈʰæ˧-kʰɯ˥!" |
"ə˩sɯ˧kv̩˥, | ʈʂʰæ˩~ʈʂʰæ˩˥ | kɤ˧wɤ˧-ljɤ˧-ɳɯ˥ | tʰi˧-dʑo˧-ɲi˥-ʝi˩!" |
əəə… "se˧pʰɤ˧… <se˧bɤ˧> ʝi˧-mɤ˧-zo˧-ze˩!" | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |
tʰi˩˥, | mv̩˩zo˩˥ | tʰv̩˧qo˧ tʰv̩˧-dʑo˧ | tʰi˩˥, | ə˧ʑi˧-lɑ˥ | ə˧pʰv̩˧-ki˧ | ɖɯ˧-so˩ hɑ̃˩ | tʰi˧-dzi˩. |
le˧-wo˥ | wɤ˩˥ | ɬi˧di˩ | le˧-tsʰɯ˩-dʑo˩, | tʰi˩˥, | gi˩˥, | gi˩˥, | gi˩˥ ◊ -dʑo˩, | mmm…
"ə˧mi˧! | õ˧˥, | qʰɑ˩ne˩˥ | õ˧-zɯ˧ bv̩˥-tso˩-ɲi˩? | õ˧-ə˧mi˥ F | lɑ˧-ɳɯ˧ | le˧-ʈʰæ˧-ɲi˥!"
"ɖɯ˧-zɯ˧ | qʰwæ˧kʰwɤ˧ tsɤ˧-ze˩!" | pi˧-zo˩, | tɕʰɤ˧ɲi˧ni˧˥ | ŋv̩˩-ɲi˥-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!
ŋv̩˩˥, | ŋv̩˩˥ ◊ -dʑo˩ | tʰi˩˥, | ɖɯ˧-ɲi˧-ɻ̍˧-dʑo˩, | ə˧mi˧-ɳɯ˧, | ə˧tso˧, | ʁo˧tʰo˩ hĩ˩-tsʰɯ˩-ni˩! | "njɤ˧ mv̩˩! | tʰɑ˧-ŋv̩˩!" |
əəə… "ʈʂʰæ˩~ʈʂʰæ˩˥ | kɤ˧wɤ˧-ljɤ˧ɳɯ˥, | ə˧mi˧ le˧-ʈʰæ˧˥, | ɖɯ˩lo˧ dʑo˧-ɲi˥-ʝi˩-ze˩!" |
"no˧ | õ˧-bv̩˥-õ˩ | zo˧ ʐɤ˧-tso˧-ɲi˥, | mv̩˩ ʐɤ˩-tso˥-ɲi˩!" |
"ə˧mi˧-ɳɯ˧ | no˧ qɑ˧~qɑ˥-bi˩! | no˧ | ɖwæ˩-mɤ˧-zo˧!" | pi˧-zo˩. |
tʰv̩˧-ɲi˧-ɳɯ˩, | ɖɯ˧-ʈʂʰwæ˧-ɳɯ˧ | ʈʂʰwæ˧ F -tɕɯ˧-kʰɯ˥-zo˩, |
ə˧mi˧ | le˧-mv̩˩-pʰæ˩-tɕɯ˩-kv̩˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩! | ə˧mi˧-ɳɯ˧! |
õ˧-bv̩˥-õ˩ | tʰi˩˥, | ə˧tso˧-mɤ˧-ɲi˩, | le˧-ʝi˥, | tʰv̩˧-tsɯ˧˥ ◊ -mv̩˩! |
tʰi˩˥, | zo˩no˥, | əəə… zo˧mv̩˥-lɑ˩ | le˧-ʐɤ˧-tʰv̩˧! | ʑi˧qʰwɤ˧-lɑ˧ | le˧-tsʰi˧-tʰv̩˧! | əəə… mv̩˧di˧-lɑ˥, | le˧-pæ˧˥ ◊ -tʰv̩˩! | ɖʐe˧-lɑ˧ | dʑo˧-tsɯ˧˥ ◊ -mv̩˩!
tʰi˩˥, | æ˧ʂæ˧-dʑo˩, | tɕo˧˥ʂɯ˩, | ə˧mi˧-ɳɯ˧… | "ə˧mi˧ | le˧-ʂɯ˧-bi˧, | ɖwæ˩-mɤ˧-zo˧! | ə˧mi˧-ɳɯ˧ | qɑ˧-kv̩˥!" | pi˧. |
zo˩no˥, | æ˧ʂæ˧-tɑ˩mv̩˩ | <ʈʂʰɯ˧…> ʈʂʰɯ˧ne˧-ʝi˥ | ɖɯ˧-kʰwɤ˥ | dʑo˧-ɲi˥-mæ˩! |
tʰi˩˥, | mv̩˩zo˩ tʰv̩˩-ɭɯ˩˥, | ə˧mi˧-ɳɯ˧… | ə˧mi˧-dʑo˥ | le˧-ʂɯ˧-dʑo˥ | tʰi˩˥, | ə˧tso˧ ʝi˧-ɻ̍˩, | ə˧tso˧ tʰv̩˧! |
lo˧ ʝi˧ F | lo˧-tʰv̩˧! | ɖʐe˧ ʂe˧ F | ɖʐe˧ ɖɯ˧! | go˩bo˧ ʐɤ˩ F | go˩bo˧ dʑɤ˩-kʰɯ˩! |
õ˧-ʈʂʰɯ˧ne˧-ʝi˥ ◊ -zo˩! | ə˧mi˧-ɳɯ˧ qɑ˧˥, | tʰi˩˥, | mv̩˩zo˩ tʰv̩˩-ɭɯ˩˥ ◊ -dʑo˩, | ə˧tso˧-mɤ˧-ɲi˩, | ɖwæ˧˥ | … dʑo˧-zo˩! | hɤ˩-tsɯ˩˥ ◊ -mv̩˩! |
tʰi˩˥, | hĩ˧=ɻæ˧-ɳɯ˥: | "ə˧mi˧! | ʈʂʰɯ˧, | ʈʂʰɯ˧ne˧ gv̩˧-ɲi˥-tsɯ˩-dʑo˩! | ʈʂʰɯ˧ | ʈʂʰɯ˧ne˧ ʝi˥… | ə˧tse˧ ʝi˧-zo˥ | ʈʂʰɯ˧ne˧-ʝi˥ | dʑo˧-ɲi˥-hɯ˩ F ? | pi˧. |
mv̩˩zo˩-ɳɯ˥: | "njɤ˧ | ə˧mɑ˧-ɳɯ˧ | njɤ˧-ki˧ | ʈʂʰɯ˧ne˧-ʝi˥ | ʐwɤ˩-dʑɯ˩˥ ◊ -ɲi˩: | mmm… 'ə˧dɑ˧-ə˧mi˧-dʑo˩, õ˧-zɯ˧ pv̩˥-mɤ˩-kv̩˩! | õ˧˥ | tʰi˧-dʑo˩-hĩ˩-dʑo˩, | <ʂɯ˧-bi˧-dʑo˧, sɯ.gɯ…> le˧-ʂɯ˧-hĩ˧-gi˩-dʑo˩, | le˧-sɯ˩-hĩ˩, | bi˧-hĩ˩-mɤ˩-kv̩˩!' |"
"õ˧˥ | ə˧tso˧ ʝi˧-tʰɑ˩, | le˧-ʝi˥-tsɯ˩-zo˩; | njɤ˧ | ə˧mɑ˧-ɳɯ˧, | njɤ˧-ʁo˧tʰo˩-ɳɯ˩, | ʈʂʰɯ˧ne˧-ʝi˥ | ɖɯ˧-kʰwɤ˧ ʐwɤ˧-zo˥! | njɤ˧ | ɬi˧qʰv̩˧-qo˩ | mv̩˧-zo˩! |
"njɤ˧ | tʰv̩˧-ɲi˧-ɳɯ˩ | ə˧mɑ˧ | le˧-mv̩˩-pʰæ˩!"
"ə˧tso˧ ʝi˧-ɻ̍˩, | ə˧tso˧ ʝi˧-tʰv̩˧! | njɤ˧ | ə˧mɑ˧-ɳɯ˧ | ʁo˧ʐv̩˩ F -di˩!" | pi˧-zo˩ | tʰi˩˥, |
mmm… õ˧tʰv̩˧-ɲi˧-ɳɯ˩ | tʰi˩˥, | ʈʂʰɯ˧ | mv̩˩zo˩ tʰv̩˩-ɭɯ˩˥ ◊ -dʑo˩, | ɖʐe˧-lɑ˧ | le˧-dʑo˧, | ʁwɤ˧-lɑ˧ | le˧-dʑo˧! | zo˧mv̩˥-lɑ˩ | le˧-dʑo˩! | ʑi˧qʰwɤ˧-lɑ˧ le˧-dʑo˧! | go˩bo˧-lɑ˩ | le˧-dʑo˧-zo˩ | tʰi˩˥, | æ˧ʂæ˧-qʰwɤ˧-ʈʂʰɯ˧, | ʈʂʰɯ˧ne˧-ʝi˥ | ɖɯ˧-kʰwɤ˥ | dʑo˧-ɲi˥-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩! | æ˧ʂæ˧, | ʈʂʰɯ˧ne˧-ʝi˥ | pi˧-kv̩˩! |
Autrefois, voilà ce qu'on racontait: quand le tigre ou le léopard s’en prend à l’homme, c’est la réalisation du destin. C’est tout à fait incroyable: il s'agit de drames prédestinés, dans la longue suite des générations. Les fauves n’attaquent pas comme ça sans raison! Autrefois, voilà ce qu'on disait: "Si vous voyez le léopard, c'est que votre mère va mourir! Si vous voyez le tigre, c'est que votre père va mourir!" Autrefois, il y a un homme qui est parti en montagne, et qui y a aperçu un tigre! Rentré à la maison, il a dit à son père: "Père! Qu'est-ce que ça peut bien vouloir dire? Moi, aujourd'hui, sur la montagne, là-bas, j’ai vu un tigre! Je me suis enfui à toute allure, j’étais terrorisé… J'en étais à avoir peur de mon propre halètement, je croyais entendre le tigre à mes trousses! Je pensais que j'allais mourir à tout instant!" Le père lui a répondu: "Hélas, mon fils, le proverbe nous le dit: 'Si vous voyez le tigre, c'est que votre père va mourir! Si vous voyez le léopard, c'est que votre mère va mourir'!" Ce qui t'est arrivé aujourd'hui, ce n'est pas de bon augure! Ton père va sans doute mourir! Mais il ne faut pas que tu sois en souci: ce qui doit arriver arrive! Qu'aurais-tu à craindre? Les êtres humains vieillissent et puis ils meurent, c'est comme ça! De toute façon, les parents meurent avant les enfants, ils ne peuvent pas les accompagner toute leur vie", lui a-t-il dit, à ce qu'on raconte. Alors, le fils a dit: "Père! Si tu meurs, nous, on ne pourra même plus assurer notre propre subsistance! Qu'est-ce qu'on va faire? Aucun d'entre nous n'est capable de se débrouiller, de subvenir aux besoins de la famille"! Alors, le père a dit: "Non, non, votre manque de savoir, ça ne doit pas vous inquiétez! Vous n'êtes pas tout seuls, autour de vous il y a tout le village. Prenez garde: les voisins sont susceptibles de vous faire du mal, soyez vigilants ; mais cela dit, vous pourrez aussi apprendre d’eux ce que vous ignorez! Il ne faut pas vous faire de souci!" Alors, le fils a dit: "Hélas, voilà comment les générations se succèdent… Papa va mourir; on n'y peut rien! Ce n'est pas possible, pour les parents, d'être aux côtés de leurs enfants toute leur vie durant!" Il y a aussi l'histoire d'une fille qui s'était mariée dans une famille d'une autre contrée. La fille, on l'a donnée en mariage à des gens de Yongning! La mère, elle, elle habitait à un endroit dans la région du bord du fleuve Yangtze, n'est-ce pas. Elle habitait à un endroit dans ce coin-là: dans la région du bord du fleuve. Nous les Na, on fait une différence entre Yongning et la région du bord du fleuve! (Note: dans la géographie na, les villages sur les rives du fleuve Yangtzé constituent un ensemble, désigné comme /ʐv̩˧di˧˥/. Ces lieux chauds en bordure du Yangtze sont géographiquements bien distincts de la plaine, et de la haute montagne. Un dicton souligne ce contraste: "Quand on descend dans les lieux chauds, la sueur ruisselle; quand on monte en altitude, le nez ruisselle".) Un jour, la fille s'en est retournée vers son village d'origine, au bord du fleuve. La jeune fille, la petite, s'en est retournée voir ses grand-parents, accompagnée de sa mère. La mère a dit: "Ma fille! Ca fait un bout de temps qu'on n'est pas allées voir tes grand-parents! Allons donc voir grand-mère et grand-oncle!" Elles ont dit: "Allons-y!" Le mari de la jeune fille a dit: "Vous deux, vous pouvez y aller toutes seules, pas de problème!" Sur le chemin, elles ont rencontré deux personnes. "N'ayez crainte! Moi, je suis passé sans encombres, vrai de vrai!" leur a dit une des personnes qu'elles croisaient sur le chemin. Alors, elles y sont allées! Elles ont marché, marché, marché. Pour aller à la maison de la grand-mère et du grand-oncle, il fallait passer une nuit en route. Autrefois, on partait tôt le matin, vers huit heures; sur la montagne, il y avait des cabanes de berger qui servaient de refuge. En montagne, il n'y a pas de maisons, hein! Les cabanes de bergers, ce sont les bergers qui mènent paître les yaks qui les construisent, et qui y habitent! Les bergers, quand commence la saison des pluies, ils descendent en basse altitude, chercher de l’herbe fraîche ; à l'approche de la saison sèche, ils montent en altitude! Quand ils séjournent en altitude, à la saison sèche, il fait froid par là-haut ; ils dorment dans une cabane de berger. Quand on passe la nuit dans un refuge d’altitude, on n'emporte pas de casserole avec soi. On amène un peu de nourriture. On met dans sa besace une corne d'eau, un peu de céréales, et un bout de viande! (Explication: comme récipient pour l'eau, on se servait de cornes de bœuf. Le terme pour 'corne de bœuf', /ʝi˧qʰv̩#˥/, peut également servir de classificateur. On amenait l’eau à boire depuis la plaine, les sources étant rares en montagne.) La mère et la fille se sont dit: "Nous deux, en chemin, on passera la nuit dans une cabane de bergers. On fera un feu! On fera griller notre casse-croûte!" A l'heure du crépuscule, elles sont parvenues à une cabane de berger ; et elles ont fait griller le morceau de viande qu'elles avaient apporté. La viande grillée, elle avait une forte odeur, elle flattait les narines… et le tigre l'a sentie! Juste au moment où elles avaient fini de manger viande et céréales, alors que le fumet de la viande grillée flottait encore dans l’air, on a entendu le bruit du tigre qui fouettait le sol de sa queue: Boum, Boum! Le tigre fouettait si vivement de sa queue qu'il en brisait des branchages. Voilà ce que mon aïeule nous racontait à ce sujet: "Hélas! Le tigre, quand il s'apprête à dévorer quelqu'un, il commence par fouetter le sol de sa queue!" Alors, la mère, qui était au fait de ces choses, a dit à sa fille: "Nous deux, ce soir, le tigre va nous manger!" Alors la fille a essayer de se rassurer: "Maman! Non, c'est pas possible! Ca doit être des gens qui sont venus charger des planches de bois sur la montagne! Ca fait comme un bruit de clochettes!" Le bruit que fait le tigre en fouettant le sol, ça ressemble à des clochettes qu'on secoue: gling-gling, en frappant à nouveau quelque chose (=en donnant à nouveau un coup de queue sur quelque chose)! C'est comme s'il frappait une clochette: un coup de clochette! Un coup de carillon! (Explication: il s'agit de bruits que fait le tigre en rugissant: cela ressemble au bruit aigu de clochettes; le tigre est une réalité très lointaine pour la narratrice, qui n'en a jamais vu, sauf à la télévision; c'est répétant ce qu'elle a entendu de la tradition orale qu'elle prête au tigre des bruits qui peuvent au premier abord surprendre.) Il fouette si vigoureusement de sa queue qu'il peut briser des branchages! La fille échafaudait toutes sortes d’hypothèses ; elle disait: "Ca doit être des chevaux! Il doit y avoir des chevaux qui font tinter leurs clochettes!" La mère, elle, elle savait de quoi il retournait ; et elle a redit à sa fille: "Non, non, ma fille! Ce soir, nous deux, vrai de vrai, le tigre va nous manger! On ne reverra plus grand-oncle et grand-mère! Le tigre va nous manger! – Mais non, maman! Qu'est-ce que tu dis? Ca n'est pas possible! On va maintenir la porte, et le tigre ne pourra pas entrer!" Ce que disant, la fille est allée s'arc-bouter contre la porte. Le tigre a commencé à peser dessus: Crrr! Crrr! La mère a dit à sa fille: "Tiens-toi derrière moi! Tiens-toi derrière moi! Maman va se mettre devant; toi, tiens-toi debout derrière! – Non! maman, nous deux, on va faire front ensemble!" a dit la fille. Mais la mère a poussé la fille, la rejetant en arrière, et elle est venue se placer devant sa fille. Et le tigre s’est jeté sur elle, il l’a saisie d’un coup, et l’a emportée, renversant la porte au passage. Quand les choses en sont arrivées là, la fille n'avait plus tellement peur, à ce que dit l'histoire. "Maintenant que le tigre a dévoré ma mère, il peut bien me manger moi aussi! Dans ce carnage, nous allons mourir toutes les deux! Me voilà partie pour mourir aussi, avec elle!" Mais le tigre, après avoir tué la mère, il est parti, à ce que dit l'histoire! La fille s’est lancée à sa poursuite. Le tigre s’en allait à vive allure, serrant dans ses mâchoires le cou de la mère. Il l'emportait vers le bas, dans la vallée! et la fille l’y a suivi. Comment donc elle s'est trouvée à remonter les pentes ? Dans son égarement, aveuglée par les larmes, elle a fini par reprendre le chemin de la maison de sa grand-mère et son grand-oncle, sur la montagne. C’est que la fille avait entendu comme la voix de sa mère qui lui parlait: "Ma fille! Retourne-t-en! Tu ne dois pas pleurer!" Alors la jeune fille, se retournant, était remontée jusqu'à un col. Parvenue au col, elle s’est à nouveau abandonnée aux larmes: "Hélas! Maman! Comment vais-je continuer à vivre? "Le tigre t'a emportée pour te dévorer ; que vais-je devenir? Que vais-je donc pouvoir dire à grand-mère et grand-oncle? Viens t'occuper de moi!" A force de pleurer, la jeune fille s'est finalement endormie, à ce qu'on raconte! Alors qu'elle rêvait, c'est comme si elle entendait la voix de sa mère, qui lui disait: "Ma fille! Il faut que tu retournes chez grand-mère et grand-oncle! Sois sans crainte!" En se réveillant, ces paroles lui restaient présentes. Dans son rêve, elle avait retrouvé sa mère; et au réveil, voilà qu’elle l'avait à nouveau perdue! La fille pleurait, pleurait, en allant son chemin. Elle a rencontré quelqu'un, qui lui a demandé: "Pourquoi pleures-tu? De qui es-tu la fille? Comment se fait-il que tu te trouves ici toute seule, aussi haut sur la montagne?" Alors, la jeune fille s'est jetée dans les bras de cette personne-là: "Oncle! Hier soir, le tigre a dévoré ma mère! Ma mère m’a dit de retourner auprès de grand-mère et grand-oncle, alors je suis en chemin vers chez eux! Moi, j’ai couru après le tigre, je lui ai dit de me dévorer aussi, mais il ne m'a pas mangée! Il a tué ma mère, et l'a emportée!" Alors, cet homme, cet oncle, il lui a dit: "Jeune fille, tu ne dois pas te faire de souci! Les légendes nous en parlent, de cette situation! On dit que 'Si vous voyez le léopard, c'est que votre mère va mourir! Si vous voyez le tigre, c'est que votre père va mourir!' Le léopard, il arrive qu’il dévore notre mère! Le tigre, notre père! Il ne faut pas que tu te fasses de souci! Les êtres humains, tel est leur destin: père et mère ne peuvent pas vous accompagner toute votre vie! Ta mère, dans la succession des générations, eh bien… le tigre devait la manger; il fallait qu'il en soit ainsi! Le cycle des réincarnations, voilà comment cela se déroule! Il ne faut plus te faire de chagrin pour ta mère! Désormais, ta mère te protègera depuis l'autre monde!" Comme il lui disait de s’en retourner auprès de sa grand-mère et son grand-oncle, eh bien, elle a repris son chemin vers leur demeure. Parvenue chez eux, quand elle leur a raconté tout ce qui s'était passé, ils lui ont dit: "Tu es notre enfant! On ne va pas pleurer, mais se réjouir de ta présence à toi, revenue de ce grand danger! Petit trésor, chère petite-fille! Il ne faut pas avoir de peine! Le tigre a dévoré ta mère; eh bien, qu'il en soit ainsi! C'est inscrit dans la succession des générations! Il ne faut pas que tu gardes ça sur le cœur!" La jeune fille a habité quelques jours chez sa grand-mère et son grand-oncle. Quand, par la suite, elle est retournée à Yongning, elle était toujours mélancolique. "Hélas! Comment vais-je vivre sans ma mère ? Je vais être l'objet de racontars pendant toute ma vie!" Elle pleurait à longueur de journée! Un jour, elle a une nouvelle fois entendu la voix de sa mère, comme si celle-ci se tenait debout derrière elle. "Ma fille! Ne pleure pas! Dans la succession des générations, que le tigre me dévore, et pas toi, c'est conforme à l'ordre des choses! Maintenant c'est à toi d'élever des fils, d'élever des filles! Maman va t'aider! Ne te fais pas de souci!" A partir de ce jour-là, la jeune fille a retrouvé ses esprits, comme si elle s'éveillait d'un coup! Elle a tourné la page. Elle a bien repris les choses en main, et s'est bien débrouillée en toutes choses! Elle a élevé des enfants, bâti une maison, mis des terres en culture. Elle a trouvé à gagner de l’argent. Voici ce qu’on disait autrefois: même après sa mort, une mère aide encore ses enfants, depuis l'autre monde. Autrefois, il y avait une légende comme ça! Grâce à l’aide de sa mère, tout réussissait à la jeune femme. Quand elle se consacrait à une tâche, elle y parvenait sans difficulté! Quand elle élevait du bétail, il prospérait! Ainsi elle a connu la prospérité, tout allait pour le mieux. Les gens disaient: "EEeeeh bien! Comment se fait-il donc qu'elle ait si bonne fortune"? La jeune femme leur répondait: "Voici ce que m'a dit ma mère, par le passé: 'Son père et sa mère, on ne peut les garder auprès de soi toute sa vie; celui qui reste après leur mort, celui qui est vivant, il ne doit pas songer à les accompagner dans la mort! Voilà le conseil que m'a donné ma mère! Je l'ai entendu au creux de mon oreille! De ce jour-là, j'ai cessé d'être obnubilée par le souvenir de ma mère ; et tout ce que j'ai fait m'a réussi! Ma mère est là qui me bénit et me protège depuis l'au-delà!" Voilà ce qu'on racontait autrefois!
S1 stop écouter
ə˧ʝi˧-ʂɯ˥ʝi˩, | hĩ˧ | ɖɯ˧-ʑi˩-ɻ̍˩-ʈʂʰɯ˩, ◊ ə˩-gi˩! | tʰi˩˥, | əəə… zo˩no˥… | ʈʂʰɯ˧ne˧-ʝi˥ | pi˧-ɲi˥-kv̩˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩:

Autrefois, il y avait une famille, n'est-ce pas! Et alors, eh bien… Voilà ce qu'on raconte:

S2 stop écouter
zo˩no˥, | lɑ˧, | ʐæ˩˥, | pi˧-hĩ˧-ʈʂʰɯ˧-dʑo˩, | zo˩no˥, | hĩ˧ ʈʰæ˩, | ʈʂʰɯ˧-dʑo˩, ◊ ə˩-gi˩! |

eh bien, le tigre, le léopard, eux, eh bien, le fait qu'ils s'en prennent à l'homme/ qu'ils dévorent des gens, n'est-ce pas!

S3 stop écouter
zo˩no˥, | mɤ˧-ni˩~ni˩-hĩ˩, | zo˩no˥, | ʈʂʰæ˩~ʈʂʰæ˩-qo˥, | zo˩no˥, | kwɤ˧wɤ˧ mɤ˧-ɲi˥-dʑo˩, | ʈʰæ˧-mɤ˥-kv̩˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!

Eh bien, ce qui est incroyable, eh bien, c'est que… dans la suite des générations, s'il y a pas de prédestination, [les fauves] n'attaquent pas! / Ce qui est incroyable, c'est qu'il s'agit de drames prédestinés, dans la longue suite des générations; faute de quoi, les fauves ne vous attaquent pas!

S4 stop écouter
tʰi˩˥, | æ˧ʂæ˧-ʈʂʰɯ˧, | ʈʂʰɯ˧ne˧-ʝi˥ | pi˧-kv̩˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩:

Autrefois, voilà ce qu'on racontait:

S5 stop écouter
"ʐæ˩ do˥, | ə˧mi˧ ʂɯ˧! | lɑ˧ do˩, | ə˧dɑ˧ ʂɯ˧!" | pi˧-kv̩˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |

on dit que "Si vous voyez le léopard, c'est que votre mère va mourir! Si vous voyez le tigre, c'est que votre père va mourir!"

S6 stop écouter
tʰi˩˥, | "lɑ˧ do˩, | ə˧dɑ˧ ʂɯ˧!" | pi˧-hĩ˧-ʈʂʰɯ˧-dʑo˩ | tʰi˩˥, | ə˧ʝi˧-ʂɯ˥ʝi˩, | zo˩no˥, | dʑɯ˩ʁo˩-ʈʂʰɯ˥, | zo˧ ɖɯ˧-v̩˧-ʈʂʰɯ˧, | dʑɯ˩nɑ˩mi˩ʁo˩ hɯ˩-ɲi˥-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!

Alors, ce dicton selon lequel "Si vous voyez le tigre, c'est que votre père va mourir", eh bien, autrefois, en montagne… il y a un homme qui est allé en montagne!

S7 stop écouter
dʑɯ˩nɑ˩mi˩ʁo˩ hɯ˩˥ ◊ -dʑo˩, | lɑ˧ ɖɯ˧-pʰo˧ do˧-tsɯ˥ ◊ -mv̩˩! |

Parti en montagne, on dit qu'il a aperçu un tigre!


NOTE : tons de /lɑ˧ ɖɯ˧-pʰo˧ do˧-tsɯ˥ ◊ -mv̩˩/ vérifiés
NOTE : élicité au passage: /ɖɯ˧-pʰo˧ do˧˥/ 'voir un [gros animal]'
S8 stop écouter
tʰi˩˥, | lɑ˧ ɖɯ˧-pʰo˧ do˧˥ ◊ -dʑo˩ | tʰi˩˥, | ɑ˩ʁo˧ le˧-hɯ˩-dʑo˩, |

Alors, comme il avait aperçu un tigre, rentré à la maison, [il dit à son père:]

S9 stop écouter
əəə… "ə˧dɑ˧! | ə˧tse˧ ʝi˧-ɲi˥? | njɤ˧ | tsʰi˧-ɲi˧ | dʑɯ˩ʁo˩˥ | tʰv̩˧-qo˧ | lɑ˧ ɖɯ˧-pʰo˧ do˧-zo˥! | njɤ˧ | le˧-ɖwæ˩-zo˩, | le˧-pʰo˩, | le˧-pʰo˩, | le˧-pʰo˩-zo˩!" |

il a demandé: "Père! Qu'est-ce que ça peut bien vouloir dire? Moi, aujourd'hui, sur la montagne, là-bas, en voyant un tigre… étant effrayé, je me suis enfui, enfui, enfui!"

S10 stop écouter
"<õ˧-bv̩˥-õ˩…> [õ˧-so˥-ɳɯ˩, | õ˧ ɖwæ˥!] | õ˧-ɬi˧qʰv̩˧-ɳɯ˩, | õ˧-so˥-ɳɯ˩, | õ˧ gɤ˥!" | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. õ˧˥ | hhh… hhh… hhhɑ̃! pi˧-hĩ˧-tʰv̩˧-ɳɯ˩, | õ˧˥ | le˧-ɖwæ˩, | le˧-ʂɯ˧-ho˧-ze˩! | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |

Il a raconté: "[J'en étais à avoir peur de mon propre souffle!] Dans ma propre oreille, le bruit de mon propre souffle me faisait peur! Ma propre respiration, hha-hha-hha, elle me faisait peur; [je pensais que] j'allais mourir!" (Explication: s'enfuyant en courant, l'homme épouvanté confondait parfois le bruit de sa lourde respiration avec les grondements du tigre qu'il redoutait d'entendre tout près de lui)


NOTE : /gɤ˩a/: avoir peur
NOTE : ton de /ze˩/ dans /le˧-ʂɯ˧-ho˧-ze˩/: fortement remonté par l'intonation/l'expression de l'émotion; fait penser phonétiquement à un ton haut.
S11 stop écouter
tʰi˩˥, | ə˧dɑ˥-ɳɯ˩ | ʈʂʰɯ˧ne˧-ʝi˥ | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩:

Alors, voici ce qu'a dit le père:

S12 stop écouter
"mɤ˧-dɑ˩! | njɤ˧ zo˧! F | ə˩zɯ˩˥… | ʈʂʰɯ˧-dʑo˩, | æ˧ʂæ˧-tɑ˩mv̩˩-dʑo˩ | dʑo˧-ɲi˥-mæ˩!" |

"Hélas! Mon fils! Nous deux… Les légendes nous le disent" (littéralement "ça existe dans les légendes"):

S13 stop écouter
" '<ʐæ˩ d…> lɑ˧ do˩, | ə˧dɑ˧ ʂɯ˧! | ʐæ˩ do˥, | ə˧mi˧ ʂɯ˧!' | pi˧!" |

"On dit que 'Si vous voyez le tigre, c'est que votre père va mourir! Si vous voyez le léopard, c'est que votre mère va mourir'! "


NOTE : tons de /ə˧dɑ˧ ʂɯ˧/ vérifiés
NOTE : d'abord noté /‡ʐæ˩ do˩˥/
S14 stop écouter
tsʰi˧ʝi˧-dʑo˩ | tʰi˩˥, | no˧ | ɖɯ˧-pi˧˥ | mɤ˧-dʑɤ˩-ɲi˩! |

Aujourd'hui, il t'est arrivé quelque chose d'un peu fâcheux! / Ce qui t'est arrivé aujourd'hui, ce n'est pas bon/ce n'est pas un bon présage!

S15 stop écouter
"ə˩zɯ˩˥, | ə˧dɑ˧ ʂɯ˧-ho˥-ɲi˩!" |

"Nous deux… le père va sans doute mourir!"


NOTE : intéressant: le père est présenté comme un membre d'une paire qu'il constitue avec le fils; on pourrait traduire par: 'Nous deux, on va perdre le père'; le point de vue du père n'est pas celui de l'individu, mais de la famille.
S16 stop écouter
"no˧ | ɖwæ˩-mɤ˧-zo˧!" | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |

"Il ne faut pas que tu te fasses de souci!" lui a-t-il dit. / "Mais il ne faut pas que tu te fasses de souci; ce qui doit arriver arrive!" lui a-t-il dit.

S17 stop écouter
"no˧ | ə˧tso˧ ɖwæ˩? | ə˩zɯ˩˥, | hĩ˧-dʑo˩, | le˧-mo˩ | le˧-ʂɯ˧-kv̩˧˥!" |

"Qu'aurais-tu à craindre? Nous deux… les êtres humains, ils vieillissent et puis ils meurent[, c'est comme ça]!"

S18 stop écouter
"ə˧dɑ˥ | ɖɯ˧-zɯ˧ | no˧-sɯ˩kv̩˩ | zɯ˧ pv̩˩-mɤ˩-ʝi˩!" | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |

"De toute façon, papa ne peut pas vous accompagner toute votre vie! (=de toute façon, les parents meurent avant les enfants, ils ne peuvent pas les accompagner toute leur vie)" lui a-t-il dit, à ce qu'on raconte.


NOTE : /ɖɯ˧-zɯ˧/: ressemble phonétiquement à: /‡ɖɯ˧-zɯ˧-ɻ/, mais il est bien vérifié qu'il n'y a pas de troisième syllabe.
S19 stop écouter
tʰi˩˥, | zo˧-ɳɯ˩: | "ə˧dɑ˥! | no˧ | le˧-ʂɯ˧-se˥, | njæ˧sɯ˩kv̩˩ | hɑ˧ F | dzɯ˧ mɤ˧-ʝi˧! | qʰɑ˩ne˩ ʝi˥-bi˩?" |

Alors, le fils a dit: "Père! Si tu meurs, nous, on ne pourra même plus manger! Qu'est-ce qu'on va faire?"


NOTE : structure de l'information: ici, F prend le sens de: 'même pas…'; hésité à noter F ou non; cas limite.
NOTE : vérifié: le découpage est: /hɑ˧ | dzɯ˧ mɤ˧-ʝi˧/, non /‡hɑ˧ dzɯ˧ | mɤ˧-ʝi˧/.
S20 stop écouter
"njæ˧sɯ˩kv̩˩, | ɖɯ˧-v̩˧ | ɖɯ˧-sɑ˥ F | mɤ˧-sɯ˥!" | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |

"[Parmi] nous, il n'y en a aucun qui sache quoi que ce soit!" (=aucun d'entre nous n'est capable de se débrouiller/de reprendre l'avenir de la famille en main)

S21 stop écouter
tʰi˩˥, | ə˧dɑ˥-ɳɯ˩: | "ejo! mɤ˧-sɯ˥-dʑo˩, | ɖwæ˩-mɤ˧-zo˧!" |

Alors, le père a dit: "Eeeh là! Votre ignorance/votre manque de savoir, ça ne doit pas vous inquiétez!"

S22 stop écouter
"əəə… ʁwɤ˧-qo˧ dzi˩-ɲi˩! | fv̩˩-ɳɯ˥ | <p…> kɯ˩-kv̩˥! | bi˧-ɳɯ˧ | kɯ˩-kv̩˥!" |

"Euh… Vous habitez dans un village (=vous n'êtes pas tout seuls, vous devez prendre garde aux gens qui vous entourent)! [Prenez garde:] Les voisins sont susceptibles de vous faire du mal! Les gens du village sont susceptibles de vous faire du mal!"


NOTE : syntaxe: intéressant: construction dans laquelle un terme généralement employé sous sa forme disyllabique: /fv̩˩bi˩/ 'contrée, voisinage, ensemble de villages où habitent des gens de la famille étendue', se trouve divisé en ses deux parties, le dédoublant, en quelque sorte, pour rendre le propos plus affirmatif/enfoncer le clou. Autre exemple plus bas: /ɖʐe˧-lɑ˧ | le˧-dʑo˧, | ʁwɤ˧-lɑ˧ | le˧-dʑo˧/ 'elle a eu de l'argent et des richesses'.
S23 stop écouter
hĩ˧-ɳɯ˩ | hĩ˧ so˥ | le˧-po˧-jo˥ ◊ -dʑo˩, | ʁwɤ˧[-qo˧]-ɳɯ˧ | so˩-kv̩˩˥! | no˧-sɯ˩kv̩˩, | ɖwæ˩-mɤ˧-zo˧!" | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |

"Les gens savent enseigner les uns aux autres! Les gens du village vont vous apprendre! Vous, vous ne devez pas vous faire de souci!"


NOTE : La formulation /ʁwɤ˧-qo˧-ɳɯ˧ | so˩-kv̩˩˥/ est jugée préférable à celle de l'enregistrement, /ʁwɤ˧-ɳɯ˧ | so˩-kv̩˩˥/. (Vérifié à 2 reprises en oct. 2012.)
S24 stop écouter
əəə, tʰi˩˥… | ĩ˧!

Euh, alors... Oui ! (réponse à quelques mots dits par l'enquêteur: "Les villageois prendront soin d'eux!")

S25 stop écouter
tʰi˩˥, | "ʈʂʰæ˩~ʈʂʰæ˩˥ | kɤ˧wɤ˧ ljɤ˧-qo˥-ɳɯ˩ | le˧-tsʰɯ˩, | ə˧dɑ˥ | le˧-ʂɯ˧-bi˧, | ə˩zɯ˩˥ | pæ˧˥hwɤ˧ mɤ˧-dʑo˧-ze˧!" |

Alors, le fils a dit: "Voilà comment les générations se succèdent! Papa va mourir; nous deux, on n'y peut rien!"

S26 stop écouter
"ə˧dɑ˧-ə˧mi˧-dʑo˩, | zo˧mv̩˥ | zɯ˧ pv̩˩-hĩ˩ | mɤ˧-dʑo˩-ɲi˩!" | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |

"Il n'existe pas de père et mère qui puissent accompagner les enfants tout au long de leur vie! / Ce n'est pas possible, pour les parents, d'être aux côtés de leurs enfants toute leur vie durant!"


NOTE : on pourrait également dire: /zɯ˧ pv̩˩-mɤ˩-kv̩˩/.
S27 stop écouter
tʰi˩˥, | ʈʂʰɯ˧ne˧ ʝi˥-dʑo˩, | tʰi˩˥, | ɖɯ˧-ɲi˧-ɻ̍˧-dʑo˩, | mv̩˩-lɑ˥, | zo˩no˥, | mv̩˩-ʈʂʰɯ˥, | zo˩no˥, | ɖɯ˧-di˩ ki˩-ɲi˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |

Alors, comme ça, eh bien, un jour, la fille, eh bien, la fille, on l'a donnée [en mariage] quelque part. / Il y a aussi l'histoire d'une fille, qui s'était mariée dans une famille d'une autre contrée.

S28 stop écouter
zo˩no˥, | mv̩˩-ʈʂʰɯ˥, | ɬi˧di˩ ki˩! |

La fille, on l'a donnée [en mariage à des gens de] Yongning!

S29 stop écouter
ə˧mi˧-ʈʂʰɯ˧ | tʰi˩˥, | mmm… <ʐv̩˧di˧ dʑo˧˥ | ɖɯ˧-ʝi˧ ɲi˩-ze˩-mæ˩> [ʐv̩˧di˧-ni˧˥ | ɖɯ˧-ʝi˧-qo˧ | dʑo˧-ɲi˧-ho˥-ze˩-mæ˩], ◊ ə˩-gi˩! | dʑɯ˩ʁo˩-ʁo˩to˥ | <ɖɯ˩-tɕo˧ fæ˧-hĩ˧ | ɖɯ˧-ʝi˧-qo˧ | dʑo˩-ɲi˩-ho˥-ze˩-mæ˩> [dv̩˩tɕo˧ fæ˧ ɖɯ˧-ʝi˧-qo˧ | dʑo˩-ɲi˩-ho˥-ze˩-mæ˩]! |

La mère, elle, elle habitait à un endroit dans la région du bord du fleuve, n'est-ce pas. Elle habitait à un endroit dans ce coin-là. (Note: dans la géographie na, les villages sur les rives du fleuve Yangtzé constituent un ensemble; désigné comme /ʐv̩˧di˧˥/. Ces lieux chauds en bordure du Yangtze sont géographiquements bien distincts de la plaine, et de la haute montagne. Un dicton souligne ce contraste: "Quand on descend dans les lieux chauds, la sueur ruisselle; quand on monte en altitude, le nez ruisselle".)


NOTE : sens de: /dv̩˩tɕo˧ fæ˧/, /ɖɯ˩-tɕo˧ fæ˧/: il s'agit d'un emprunt chinois, 方[向]::direction.
NOTE : /ʐv̩˧di˧ dʑo˧˥/: 'se trouver au bord du fleuve/habiter au bord du fleuve'.
S30 stop écouter
ʐv̩˧di˧-ki˥ ɲi˩-kv̩˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩! |

C'est dans la région du bord du fleuve!


NOTE : Cette phrase reprend/répète ce qui vient d'être dit au sujet du lieu d'origine de la jeune femme.
S31 stop écouter
ʐv̩˧di˧-pi˥-kv̩˩-ze˩, | njæ˧sɯ˩kv̩˩-dʑo˩, | nɑ˩-dʑo˥! |

On parle de "la région du bord du fleuve", nous, les Na!

S32 stop écouter
ɬi˧di˩, | ʐv̩˧di˧ pi˥! | tʰi˩˥… |

On parle de "Yongning"; et des "régions du bord du fleuve"!

S33 stop écouter
tʰv̩˧qo˧-ki˧ ◊ -dʑo˩ | tʰi˩˥, | mv̩˩˥ ◊ -dʑo˩ | tʰi˩˥, | ɖɯ˧-hɑ̃˧˥ ◊ -dʑo˩, | le˧-bi˩, | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |

Là-bas, eh bien, la fille, un jour, elle est partie, à ce qu'on raconte. / Un jour, la fille s'en est retournée vers son village d'origine, au bord du fleuve.

S34 stop écouter
ɑ˩ʁo˧ | ə˧ʑi˧-lɑ˥ | ə˧pʰv̩˧-ki˧ | le˧-bi˩, | pi˧, | mv̩˩zo˩˥ | æ˧mv̩˥-tɕi˩-hĩ˩, | ə˧mi˧-mv̩˩ | tʰi˧-ki˧-hĩ˧ | tʰv̩˧-v̩˧-ɳɯ˩. |

Elle s'en est retournée voir sa grand-mère et son grand-oncle, la jeune fille, la mère et sa fille… celle (=la mère) qui avait donné (sa fille en mariage). / La jeune fille, la petite, s'en est retournée voir sa grand-mère et son grand-oncle, accompagnée de sa mère; sa mère, qui l'avait donnée en mariage.

S35 stop écouter
tʰi˩˥, | "njɤ˧-mv̩˩! | ə˩zɯ˩˥, | ɖɯ˧-ʈʂæ˧˥ | le˧-mɤ˧-kʰi˧-ze˥!" |

La mère a dit: "Ma fille! Ca fait un bout de temps qu'on n'est pas allées [voir ta grand-mère et ton grand-oncle]!"


NOTE : /ɖɯ˧-ʈʂæ˧˥/: réalisé phonétiquement proche de [ɖʐɯ˧-ʈʂæ˧˥], comme par anticipation de l'affrication de la syllabe suivante.
S36 stop écouter
mmm… "<ə˧mi˧-lɑ˧… əəə…> ə˧ʑi˧-lɑ˥ | ə˧pʰv̩˧-ki˧ | le˧-bi˩-zo˩-ho˩ F -di˩!" | pi˧ ◊ -dʑo˩ | tʰi˩˥, |

"Allons donc voir grand-mère et grand-oncle!"

S37 stop écouter
tʰi˩˥, | "bi˧-tsæ˧-ɲi˩!" | pi˧ | tʰi˩˥, | ʈʂʰɯ˧ | pʰæ˧tɕi˥ | ʈʂʰɯ˧-v̩˧-ɳɯ˩: |

Elles ont dit: "Allons-y!" Alors, le jeune homme (=le mari de la jeune fille) a dit:

S38 stop écouter
tʰi˩˥, | "no˧zɯ˩… no˩zɯ˧-tɑ˧kɤ˥ | bi˧-tʰɑ˧-ʝi˥! | <ɖwæ… əəə…> se˧-ʁo˧-ʝi˥!" | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |

"Vous deux, vous pouvez y aller toutes seules! Vous pouvez y aller à pied!" a-t-il dit.


NOTE : on pourrait également dire: /no˧zɯ˩-tɑ˩kɤ˩/, et /le˧-bi˩-ʁo˩-ʝi˩/
NOTE : de: /no˩zɯ˧˥/ 'vous deux'; variante: /no˧zɯ˩/.
S39 stop écouter
tʰi˩˥, | ʐɤ˩mi˩-qo˥, | hĩ˧ ɲi˥-kv̩˩ ʁo˩-pv̩˩-dʑo˩. |

Sur le chemin, elles ont rencontré deux personnes.


NOTE : tons de /ʁo˩-pv̩˩-dʑo˩/ vérifiés
S40 stop écouter
"ɖwæ˩-mɤ˧-zo˧-wɤ˧! | njɤ˧ F | ʈʰææ̃˧ | se˧-ɲi˥!" | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |

"N'ayez crainte! Moi, je suis passé [sans encombres], vrai de vrai!" [leur ont dit ces personnes qu'elles croisaient sur le chemin]

S41 stop écouter
"njɤ˧ F | ʈʰææ̃˧ | le˧-kʰi˧˥ ◊ -ɲi˩, | se˧-ɲi˥, | ɖwæ˩-mɤ˧-zo˧!" | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |

"Moi, vrai de vrai, j'y suis allé, j'ai marché [sur ce sentier], n'ayez crainte!" leur a-t-on dit.

S42 stop écouter
tʰi˩˥, | kʰi˧˥! | tʰi˧-se˥, | tʰi˧-se˥, | tʰi˧-se˥ ◊ -dʑo˩, | ʐɤ˩mi˩-qo˥ | ɖɯ˧-hɑ̃˧ tʰi˥-hɑ̃˩-ɳɯ˩, | ɑ˩ʁo˧ tʰv̩˧-ɲi˥-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |

Alors, elles y sont allées! Elles ont marché, marché, marché; en dormant une nuit en chemin, on parvient à la maison [de la grand-mère et du grand-oncle].

S43 stop écouter
tʰi˩˥, | ə˧ʝi˧-ʂɯ˥ʝi˩-dʑo˩, | mv̩˩sɯ˧-njɤ˧˥, | tv̩˧tsʰɯ˧ hõ˧-ɭɯ˥ | bi˧-dʑo˩ | tʰi˩˥, | bv̩˩hwɤ˩-pi˥-zo˩! |

Or autrefois, on partait tôt le matin, vers huit heures; il y avait des cabanes de berger [qui servaient de refuge sur la montagne]!

S44 stop écouter
dʑɯ˩nɑ˩mi˩ʁo˩˥ ◊ -dʑo˩, | ʑi˧qʰwɤ˧ | mɤ˧-di˩-ɲi˩-mæ˩! |

En montagne, il n'y a pas de maisons, hein!

S45 stop écouter
bv̩˩hwɤ˩-pi˥-zo˩ | tʰi˩˥, | <lo˧, əəə…> bv̩˩lv̩˩-hĩ˥-ɳɯ˩ | ʑi˧qʰwɤ˧ le˧-dɑ˧˥, | tʰi˧-dzi˩ | əəə… -dʑo˩! | bv̩˩lv̩˩-hĩ˥ | ʈʂʰɯ˧-dʑo˩ | tʰi˩˥, | əəə… mv̩˧ʐe˧-qo˥, | so˧ɬi˧-qʰv̩˧ɬi˥-dʑo˩, | mv̩˧ʈʰæ˧! | ɖɯ˧-pi˧˥ | mv̩˧ʈʰæ˧ ʂe˧~ʂe˧ | lv̩˩-ʝi˥-kv̩˩-mæ˩! | zɯ˧ tʰi˧-di˧! |

Les cabanes de bergers, eh bien, ce sont les bergers qui mènent paître les yaks qui construisent des maisons, et qui y habitent! Les bergers, pendant la saison des pluies, au troisième, quatrième mois, ils vont mener leurs bêtes en bas (=en basse altitude), pour y trouver [de l'herbe] / Quand commence la saison des pluies, ils descendent en basse altitude! C'est qu'il y a de l'herbe [à ces endroits-là]!


NOTE : formulation plus explicite: /zɯ˧ ʂe˩/: rechercher de l'herbe.
S46 stop écouter
mv̩˧tsʰi˧-qo˩ | qʰv̩˧-ɬi˧-dʑo˩, | gɤ˧bi˧ bi˧-kv̩˩-ze˩-mæ˩! |

A la saison sèche (=à l'approche de la saison sèche), ils vont en haut / ils montent en altitude!

S47 stop écouter
tʰi˩˥, | ʈʂʰɯ˧ne˧ ʝi˥-kwɤ˩tɕɯ˩-lɑ˩ | tʰi˩˥, | mmm… gɤ˧bi˧ hɯ˧-hĩ˧ | mv̩˧tsʰi˧-qo˩ | le˧-hɯ˩ ◊ -dʑo˩ | tʰi˩˥, | <ɖʐo˧-hĩ˧… |> gɤ˧bi˧ | ɖʐo˧-hĩ˧ ʈʂʰɯ˧-ʈʂæ˩-qo˩ | le˧-hɯ˩-dʑo˩, | bv̩˩hwɤ˩˥ | ɖɯ˧-ɭɯ˧-qo˧ hɑ̃˧-tsɯ˥ ◊ -mv̩˩! |

Alors, comme ils procèdent ainsi, eh bien… Ceux qui sont partis en altitude, ceux qui sont partis à la saison sèche, à la période où il fait froid en altitude, ils dorment dans une cabane de berger!

S48 stop écouter
tʰi˩˥, | bv̩˩hwɤ˩˥ | ɖɯ˧-ɭɯ˧-qo˧ tʰi˧-hɑ̃˧˥, | tʰi˧-hɑ̃˧˥ ◊ -dʑo˩, | tʰi˧-hɑ̃˧˥, | mv̩˩zo˩-lɑ˥ | ɲi˧-kv̩˧˥ | tʰi˩˥, | əəə… ɑ˩ʁo˧ | tʰi˩˥, | hɑ˧… hɑ˧… hɑ˧ F -qɑ˩ | tʰi˩˥, | <gv…> v̩˧ F | mɤ˧-po˧˥! |

Alors, comme on dort dans une cabane de bergers, la fille et [sa mère], toutes les deux, eh bien… la maison… la nourriture… la nourriture, eh bien… on n'emporte pas de casserole [avec soi]!

S49 stop écouter
hɑ˧ | <le… bv… le…> [ɑ˩ʁo˧ | õ˧-bv̩˥-õ˩] le˧-gv̩˩-hĩ˩ | ɖɯ˧-kʰwɤ˥ po˩, ◊ ə˩-gi˩! |

La nourriture, on en amène un peu qu'on a préparé soi-même à la maison!

S50 stop écouter
"ʐɤ˩mi˩-qo˥… | ə˩zɯ˩˥ | tsʰo˧qʰwɤ˩-dʑo˩ | bv̩˩hwɤ˩-qo˥ hɑ̃˩ ◊ -dʑo˩, | mv̩˧ | ɖɯ˧-æ˩ | tʰi˧-kʰɯ˩! | tʰv̩˧-kʰwɤ˧ bv̩˧, | dzɯ˧-tsæ˧-ɲi˩!" | pi˧-zo˩ | tʰi˩˥, |

"Sur le chemin… nous deux, ce soir, comme on passera la nuit dans une cabane de bergers, on fera un feu! On fera griller ce[tte nourriture qu'on emporte avec nous], et on la mangera!"


NOTE : /mv̩˧ | ɖɯ˧-æ˩/: réalisation très coarticulée
S51 stop écouter
mmm… <dʑɯ˧ | ɖɯ˧-ɭ… əəə… dʑ…> dʑɯ˧ | ɖɯ˧-qʰv̩˧tʰv̩˧ tʰi˩-kʰɯ˩! |

On met une corne d'eau [dans sa besace]! / On emporte un peu d'eau! (Explication: comme récipient pour l'eau, on se servait de cornes de bœuf. Le terme pour 'corne de bœuf', /ʝi˧qʰv̩#˥/, peut également servir de classificateur. On emportait de l'eau depuis la plaine, pour ne pas se retrouver sans eau en haute montagne.)


NOTE : tons vérifiés: est /ɖɯ˧-qʰv̩˧tʰv̩˧ tʰi˩-kʰɯ˩/; l'abaissement du ton de /tʰi˧-kʰɯ˧˥/ paraît être commandé par la présence d'un ton H dans /ɖɯ˧-qʰv̩˧tʰv̩#˥/. Il serait également possible de dire, en deux groupes: /ɖɯ˧-qʰv̩˧tʰv̩˧ | tʰi˧-kʰɯ˧˥/.
NOTE : Sens vérifié: on emporte de l'eau dans la montagne, depuis la plaine; les sources sont rares en haute montagne.
S52 stop écouter
əəə… hɑ˧ | ʝi˧kʰwɤ˥ tʰi˩-kʰɯ˩! | ʂe˧ | ɖɯ˧-kʰwɤ˥ tʰi˩-kʰɯ˩! |

On met un peu de céréales [dans sa besace]! On met un bout de viande [dans sa besace]!


NOTE : intéressant: emploi de /ʝi˧kʰwɤ˥/ 'un peu'
S53 stop écouter
tʰi˩˥, | mv̩˩-lɑ˥ | ʈʂʰɯ˧zɯ˩-dʑo˩, | mv̩˩kʰv̩˧˥ | nɑ˩dzi˧; |

Alors, la mère et [sa fille], elles deux, le soir, le crépuscule [est venu]!


NOTE : /mv̩˩kʰv̩˧˥/: avant 2016, noté /‡‡mv̩˩kʰv̩˩˥/
S54 stop écouter
nɑ˩dzi˧-kwɤ˩tɕɯ˩-lɑ˩ | tʰi˩˥, | bv̩˩hwɤ˩-qo˥ tʰv̩˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!

Quand le crépuscule est venu / A l'heure du crépuscule, [elles] sont parvenues à une cabane de berger!

S55 stop écouter
bv̩˩hwɤ˩-qo˥ | tʰv̩˧ ◊ -dʑo˩ | tʰi˩˥, | ʂe˧ tʰv̩˧-kʰwɤ˧ | tʰi˧-bv̩˥-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!

Parvenues à la cabane de berger, on dit qu'elles ont fait griller ce morceau de viande (=le morceau de viande qu'elles avaient apporté).

S56 stop écouter
tʰi˩˥, | ʂe˧ tʰv̩˧-kʰwɤ˧ | tʰi˧-bv̩˥, | mv̩˩zo˩-lɑ˥ | ə˧mi˧-dʑo˥, | mv̩˧ | ɖɯ˧-æ˩ tʰi˩-kʰɯ˩, | ʂe˧ | tʰi˧-bv̩˥ ◊ -dʑo˩ | tʰi˩˥, | <v…> lɑ˧-ʈʂʰɯ˧-ɳɯ˩-dʑo˩, | ʂe˧, | əəə… bv̩˧nv̩˧-tsɯ˥ ◊ -mv̩˩, | ɲi˧qʰv̩˧-qo˧ | bv̩˧nv̩˧-zo˩! |

Elles ont fait griller ce morceau de viande (=le morceau de viande qu'elles avaient apporté), la fille et la mère; comme elles faisaient un feu, et faisaient griller la viande, le tigre, lui… la viande, euh, elle avait une forte odeur, elle flattait les narines [et le tigre l'a sentie]!


NOTE : tons de /bv̩˧nv̩˧-zo˩/ vérifiés
S57 stop écouter
bv̩˧nv̩˧-dʑo˧ | tʰi˩˥, | tɑ˧~tɑ˧ | ʈʂʰɯ˧zɯ˩ | ʂe˧-lɑ˩ | hɑ˧ | le˧-dzɯ˧-se˥-dʑo˩, | bv̩˧nv̩˧-zo˩ | tʰi˩˥, | lo˧qo˧-dʑo˩, | põ! põ pi˧, | tʰi˧-ɖwæ˧˥ ◊ -dʑo˩-pi˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. | lɑ˧-mæ˧qv̩˩-ʈʂʰɯ˩-ɳɯ˩! |

Comme [la viande] répandait son odeur, juste au moment où elles deux avaient fini de manger viande et nourriture, comme [la viande] fleurait bon, le tigre a fouetté [le sol de sa queue]: Boum, Boum! C'est la queue [du tigre qui fouettait ainsi le sol]. / Alors qu'elles avaient fini leur repas, mangeant cette viande qui avait si bon fumet, on a entendu au dehors le tigre qui fouettait le sol de sa queue: Boum! Boum!


NOTE : pour structure de l'information: exemple, parmi d'autres, d'extraposition du sujet.
NOTE : tons de /bv̩˧nv̩˧-dʑo˧/ et /lo˧qo˧-dʑo˩/ vérifiés
NOTE : à la première transcription, avais omis /-pi/ dans /tʰi˧-ɖwæ˧˥ ◊ -dʑo˩-pi˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩/, transcrivant simplement /tʰi˧-ɖwæ˧˥ ◊ -dʑo˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩/; formule qui serait également acceptable.
S58 stop écouter
lɑ˧-mæ˧qv̩˩-ʈʂʰɯ˩-ɳɯ˩ | põ! põ! pi˧ | le˧-ɖwæ˧˥ ◊ -dʑo˩ | tʰi˩˥, | si˧dzi˩ tʰv̩˩ | tsi˩qwæ˩-tsi˧qwæ˧! pi˧, | qʰæ˧~qʰæ˧-tsɯ˧˥ ◊ -mv̩˩! |

Comme la queue du tigre fouettait [de toutes parts], Boum! Boum!, les arbres, ils se brisaient: Crac! Crac! (=le tigre fouettait si vivement de sa queue qu'il en brisait des branchages)

S59 stop écouter
tʰi˩˥, | ə˧ʝi˧-ʂɯ˥ʝi˩ | tʰi˩˥, | mv̩˩zo˩-ə˩mi˥-ʈʂʰɯ˩-ɳɯ˩ ◊ -dʑo˩, | tʰv̩˧, | ə˧si˧-ɳɯ˧ | ʈʂʰɯ˧ne˧-ʝi˥ | ʐwɤ˩-kv̩˩-pi˥-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |

Et alors, autrefois… la jeune femme et sa mère, cette histoire-là (littéralement: "cela"), [mon] aïeule, voilà comment elle en parlait.


NOTE : /ʈʂʰɯ˧ne˧-ʝi˥ | ʐwɤ˩-kv̩˩-pi˥-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩/: tons vérifiés.
NOTE : avais d'abord noté /‡ə˧si˧-ɳɯ˩/ (correction 2013)
S60 stop écouter
"ə˧mi˧! | lɑ˧-ʈʂʰɯ˧ | hĩ˧ ʈʰæ˩-ho˩-pi˩, | mæ˧qv̩˩-sɯ˩ | ɖwæ˧-kv̩˥!" | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |

"Hélas! Le tigre, quand il s'apprête à dévorer quelqu'un (littéralement: à mordre un homme), il commence par fouetter [le sol] de sa queue!" disait-elle.


NOTE : vérifié: est bien /hĩ˧ ʈʰæ˩-ho˩-pi˩/, non /‡hĩ˧ ʈʰæ˩-ho˩ | pi˧/.
S61 stop écouter
tʰi˩˥, | əəə… zo˩no˥, | əəə… zo˩no˥, | əəə… "hĩ˧ ʈʰæ˩<-qo˩>-ho˩ ◊ -dʑo˩, | mæ˧qv̩˩-sɯ˩ | ɖwæ˧-kv̩˥-tsɯ˩! | njɤ˧ mv̩˩! | ə˧zɯ˩ | tsʰo˧qʰwɤ˩-se˩, | lɑ˧-ɳɯ˧ dzɯ˧-ho˥ F -di˩-mæ˩!" | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |

Alors, euh… [la mère a dit à sa fille:] "Quand [le tigre] s'apprête à dévorer quelqu'un, il commence par fouetter [le sol] de sa queue! Ma fille! Nous deux, ce soir, le tigre va nous manger!"


NOTE : avais d'abord noté /tsʰo˧qʰwɤ˩-se˩, | lɑ˧-ɳɯ˧ dzɯ˧-ho˥ F -di˩-mæ˩/, négligeant la syllabe /-se˩/. Vérifié: n'est pas /‡-sɯ˩/.
NOTE : observation phonétique: il y a toujours une séparation entre /ho/ et /di/; interprétation: est une focalisation intonative, F, dont l'association avec cette construction est devenue habituelle.
S62 stop écouter
tʰi˩˥, | mv̩˩-ɳɯ˥: | "ə˧mɑ˧! mɤ˧-ʝi˧-wɤ˧! | ʁɑ˩mi˧! | lɑ˧… | ə˧zɯ˩, | lɑ˧-dʑo˧, | hĩ˧=ɻæ˥, | dʑɯ˩ʁo˩˥ | gɤ˧ | gv̩˩pʰæ˩ tɕɯ˥-hĩ˩ | hĩ˧ tsʰɯ˧˥ | bɑ˩˥! | hĩ˧ | ʝi˧-kʰv̩˧ tsʰɯ˧˥ | bɑ˩˥! |

Alors la fille a dit! "Maman! Non, c'est pas possible! Houlààà, le tigre??!… Nous, le tigre… Des gens… Sur la montagne, il doit y avoir des gens qui sont venus charger des planches de bois!" (Explication: la fille essaie de se rassurer en s'imaginant qu'il s'agit simplement d'un bruit de gens qui chargent du bois.)


NOTE : /gɤ˧/: a ici le même sens de 'lieu', 'endroit' que dans /ze˩gɤ˧/ 'où' et /njɤ˧ ɖɯ˧-ʝi˧ gɤ˧ bi˧-zo˧-ho˩/ 'il faut que je me rende quelque part'
NOTE : /gv̩˩pʰæ˩/: 'planche de bois'
NOTE : /gv̩˩pʰæ˩ tɕɯ˥-hĩ˩ | hĩ˧ tsʰɯ˧˥ | bɑ˩˥! | hĩ˧ | ʝi˧-kʰv̩˧ tsʰɯ˧˥ | bɑ˩˥/: tons vérifiés
S63 stop écouter
"kɤ˩-tjɤ˧ ljɤ˧ lɑ˩-hĩ˩-ni˩-gv̩˩!" | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |

"Ca fait comme un bruit de clochettes!" (littéralement: "C'est comme s'il y avait des clochettes qui tintaient!") a dit [la fille].


NOTE : avais d'abord noté /kwɤ˩-tjɤ˧ ljɤ˧ lɑ˩-ni˩-gv̩˩/, n'entendant pas le /hĩ/. Formant un groupe tonal à lui seul, ce passage donnerait: /lɑ˧-hĩ˧-ni˥-gv̩˩/.
S64 stop écouter
lɑ˧-ʈʂʰɯ˧-dʑo˩, | ʈʂʰɯ˧ne˧ ʝi˥-kv̩˩-mæ˩, | hĩ˧ ʈʰæ˩-ho˩! |

Le tigre, c'est comme ça qu'il fait, quand il s'apprête à dévorer quelqu'un!

S65 stop écouter
kɤ˩-tjɤ˧ljɤ˧-ni˧˥, | ki.li-kõ.lõ-kõ.lõ! pi˧, | wɤ˩˥ | ɖɯ˧-bæ˧ lɑ˧-ʝi˥! |

Comme des clochettes qu'on secoue, il fait un bruit de gling-gling, en frappant à nouveau quelque chose (=en donnant à nouveau un coup de queue sur quelque chose)!


NOTE : on pourrait également dire: /ɖɯ˧-bæ˧ lɑ˧-kv̩˥/
S66 stop écouter
əəə… | tse˧bo˧ lɑ˩, | ɖɯ˧-ʂɯ˩ tʰi˩-lɑ˩! | kjɤ˩-tjɤ˧ljɤ˧ lɑ˩, | ɖɯ˧-ʂɯ˩ tʰi˩-lɑ˩! |

C'est comme s'il frappait une clochette: un coup de clochette! Un coup de carillon! (Explication: il s'agit de bruits que fait le tigre en rugissant: cela ressemble au bruit aigu de clochettes; le tigre est une réalité très lointaine pour la narratrice, qui n'en a jamais vu, sauf à la télévision; c'est répétant ce qu'elle a entendu de la tradition orale qu'elle prête au tigre des bruits qui peuvent au premier abord surprendre.)


NOTE : tons de /ɖɯ˧-ʂɯ˩ tʰi˩-lɑ˩/ vérifiés, forme un seul groupe tonal
NOTE : /tse˧bo#˥/: 'clochette'
S67 stop écouter
mæ˧qv̩˩ ɖwæ˩, | si˧dzi˩ qʰæ˩~qʰæ˩-kv̩˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!

En fouettant de sa queue, il peut briser des branchages! / Il fouette si vigoureusement de sa queue qu'il peut briser des branchages!


NOTE : tons de /si˧dzi˩ qʰæ˩~qʰæ˩-kv̩˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩/ vérifiés: tout arasé en L, dès la 2e syllabe.
S68 stop écouter
tʰi˩˥, | mv̩˩zo˩˥ ◊ -dʑo˩, | "ʐwæ˧ ɲi˥ F -di˩! | ʐwæ˧ ʝi˧kʰv̩˧ tse˧bo˧ lɑ˩-dʑo˩!" | pi˧, | mv̩˩-ɳɯ˥! | ə˧mi˧ ʈʂʰɯ˧-v̩˧-dʑo˩, | ɖɯ˧-pi˧˥ | sɯ˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!

Alors la fille a dit: "Ca doit être des chevaux! Il doit y avoir des chevaux qui font tinter leurs clochettes!" La mère, elle, [en revanche], elle comprenait [la situation] / elle savait de quoi il retournait!


NOTE : /mv̩˩-ɳɯ˥/: très réduit, ressemble à un simple [m].
S69 stop écouter
ə˧ʝi˧-ʂɯ˥ʝi˩, | hĩ˧ mo˥-hĩ˩ | ʐwɤ˩-dʑɯ˩-tsɯ˥ ◊ -mv̩˩!

Voilà ce que racontaient les anciens, autrefois!


NOTE : /ʐwɤ˩-dʑɯ˩-tsɯ˥ ◊ -mv̩˩/: très réduit, ressemble à /‡ʐwɤ˩-dʑɯ˩-zo˥/.
S70 stop écouter
"mɤ˧-ʝi˧, | mɤ˧-ʝi˧! | njɤ˧ mv̩˩! | mɤ˧-ʝi˧-ze˧! | tsʰo˧qʰwɤ˥-dʑo˩, | ə˧zɯ˩-dʑo˩, | gi˩˥, | lɑ˧-ɳɯ˧ | dzɯ˧-ho˥-ze˩! | ə˩zɯ˩˥, | ə˧ʑi˧-lɑ˥ | ə˧pʰv̩˧ | do˩-mɤ˩-ho˥ F di˩! | lɑ˧-ɳɯ˧ | dzɯ˧-ho˥-ze˩!" | pi˧-dʑo˩, | mv̩˩-ɳɯ˥: |

"Non, non, ma fille! Ca ne va plus! Ce soir, nous deux, vrai de vrai, le tigre va nous manger! Nous deux, on ne reverra plus grand-oncle et grand-mère! Le tigre va nous manger!" Comme elle disait cela, sa fille lui a répondu:

S71 stop écouter
"mɤ˧-ʝi˧! | ə˧mɑ˧, | no˧, əəə… | ə˧tso˧ ʐwɤ˩-ɲi˩?" | pi˧. | "mɤ˧-ʝi˧! | mɤ˧-ʝi˧! | ə˧zɯ˩ | kʰi˧ <le˧->[tʰi˧-]tv̩˧˥!" | pi˧-dʑo˩, | kʰi˧ tv̩˩-ɲi˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |

"Mais non, maman! Toi… Qu'est-ce que tu dis? Ca n'est pas possible! Soutenons la porte (pour empêcher le tigre d'entrer)!" Ce que disant, elle est allée s'arc-bouter contre la porte.

S72 stop écouter
kʰi˧ | tʰi˧-tv̩˧˥ ◊ -dʑo˩, | lɑ˧-ɳɯ˧ | zɯ.bv-zɯ.bv! pi˧, | mi˧-le˧-tsʰɯ˧-ɲi˥-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |

Comme elle soutenait la porte, le tigre a commencé à peser dessus: Crrr! Crrr!


NOTE : tons de /mi˧-le˧-tsʰɯ˧-ɲi˥-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩/ vérifiés.
S73 stop écouter
<mv…> mi˧-le˧-tsʰɯ˧˥ ◊ -dʑo˩ | tʰi˩˥, | <mv…> mv̩˩-ɳɯ˥: | "ə˧mɑ˧! | ə˧zɯ˩ | qʰɑ˩ne˩ ʝi˥-bi˩?" | pi˧. | ə˧mi˧-ɳɯ˧: | "no˧ | ʁo˧tʰo˩ hĩ˩! | no˧ | ʁo˧tʰo˩ hĩ˩!

Comme il commençait à peser [contre la porte], la fille a dit: "Maman! Qu'est-ce qu'on va faire, toutes les deux?" La mère lui a répondu: "Tiens-toi derrière [moi]! Tiens-toi derrière [moi]!"


NOTE : /qʰɑ˩ne˩ ʝi˥-bi˩/: syllabe /ʝi/ très réduite, mais bien présente.
NOTE : il me semble entendre comme une syllable /-ɳɯ˩/ après /no˧ | ʁo˧tʰo˩ hĩ˩/; mais, après vérification, il s'avère qu'il n'y a pas de syllabe.
S74 stop écouter
"ə˧mɑ˧ | ʁo˧dɑ˧ hĩ˧-bi˥, | no˧ | ʁo˧tʰo˩ hĩ˩!" | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |

"Maman va se mettre devant; toi, tiens-toi debout derrière!" a dit la mère, à ce que raconte l'histoire.

S75 stop écouter
mv̩˩-ɳɯ˥: | "mɤ˧-bi˧! | ə˧mɑ˧, | ə˧zɯ˩ | ↑ɲi˧-kv̩˧˥ F | kɤ˧kɤ˩ | tʰi˧-hĩ˧-bi˧!" | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |

"Non! maman, nous deux, on va se tenir côte à côte toutes les deux / on va faire front ensemble!" a dit la fille.


NOTE : avais d'abord noté /‡tʰi˧-hĩ˧-bi˥/; phonétiquement, ressemble à: [tʰi˧-hĩ˧-bi˧-pi˥], du fait de la remise à zéro partielle de la ligne de base en frontière de groupe tonal.
S76 stop écouter
tʰi˩˥, | kɤ˧kɤ˩ | tʰi˧-hĩ˧-bi˧-pi˧-dʑo˩, | tʰi˩˥, | <mv̩˩˥…> ə˧mi˧-ɳɯ˧ | mv̩˩˥ | le˧-pʰæ˧˥, | ʁo˧tʰo˩ kwɤ˩-zo˩, | əəə… ə˧mi˧ | ʁo˧dɑ˧ hĩ˧-tsɯ˥ ◊ -mv̩˩. |

Alors, comme [la fille] disait qu'[elle voulait qu'elles deux] fassent front ensemble, la mère a poussé la fille, la rejetant en arrière; euh… la mère s'est tenue debout devant / est venue se placer devant sa fille.

S77 stop écouter
tʰi˩˥, | ə˧mi˧, | lɑ˧-ɳɯ˧ | le˧-ʈʰæ˧-ɲi˥-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!

Alors, la mère, le tigre l'a dévorée!


NOTE : /le˧-ʈʰæ˧-ɲi˥-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩/: je n'aurais pas pu reconnaître ce passage sans l'aide de la locutrice; le point le plus haut de fréquence fondamentale est sur /tsɯ/; et la syllabe notée /ɲi/ me paraît plus ressembler à /bi/, à l'oreille. Mais la locutrice reconnaît sans hésitation ce passage, à plusieurs reprises.
S78 stop écouter
lɑ˧-ɳɯ˧ | ɖɯ˧-ʈɤ˧-ɳɯ˧ | le˧-ʈɤ˧-po˧-hɯ˥-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!

D'un coup, le tigre l'a saisie et l'a emportée! 老虎一拉她,就拉走了!

S79 stop écouter
tʰi˩˥, | le˧-ʈɤ˧-po˧-hɯ˥, | le˧-ʈʰæ˧˥ ◊ -dʑo˩, | tʰi˩˥, | le˧-ʈɤ˧, | ɑ˩pʰo˩ po˥-hɯ˩, | kʰi˧ | tʰi˧-dzɤ˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!

Alors, comme il l'emportait, qu'il la dévorait, eh bien, en la tirant, en sortant, il a renversé la porte! (littéralement: "la porte s'est effondrée")

S80 stop écouter
kʰi˧ | tʰi˧-dzɤ˩; | mv̩˩˥ ◊ -dʑo˩ | tʰi˩˥, | le˧-ɖwæ˩-zo˩! | <z… əəə… no˧…>

La porte s'est effondrée; la fille, elle était terrorisée!

S81 stop écouter
əəə… ʈʂʰɯ˧-ʈʂæ˧-qo˩, | mv̩˩˥ | ɖwæ˧˥ | mɤ˧-ɖwæ˩-ze˩-pi˩-tsɯ˩. |

[Euh non, en fait] à ce moment-là, la fille n'avait plus tellement peur, à ce que dit l'histoire.

S82 stop écouter
"ə˧mi˧ F | lɑ˧ le˧-ʈʰæ˧-ze˥; | njɤ˧ F | tʰi˧-ʈʰæ˧-kʰɯ˥!" |

"Ma mère, le tigre l'a mangée; alors, qu'il me mange moi [aussi]!"


NOTE : /le˧-ʈʰæ˧-ze˥/: suffixe °pfv très discret; il me paraît entendre un simple /le˧-ʈʰæ˧˥/; mais la locutrice confirme que c'est bien /le˧-ʈʰæ˧-ze˥/.
S83 stop écouter
"zo˩no˥ | … hĩ˧ F | le˧-ʂɯ˧, | ɖɯ˧-tɑ˧˥ | ʂɯ˧-tso˧-lɑ˩ ɲi˩! | ə˧mi˧ F | le˧-ʂɯ˧, | njɤ˧ F | ʂɯ˧-tso˧-lɑ˩ ɲi˩!" | pi˧. |

"Dans ce carnage, nous allons tous mourir! Ma mère, elle est morte; moi, je suis partie pour mourir [aussi]!"

S84 stop écouter
lɑ˧… | lɑ˧-lɑ˧, | ə˧mi˧-gi˧˥, | pʰo˩-ɲi˥-pi˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩! | lɑ˧-ɳɯ˧ | ə˧mi˧ | ʐɯ˩-ɳɯ˥ | ʐɯ˩-pi˥ | ʈɤ˧! | mv̩˩˥ | <pʰo˩… hõ… qʰɑ˩ne˩˥…>[qʰɑ˩ne˩˥ | pʰo˩-ɲi˥-pi˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!]

Le tigre… le tigre, lui, après avoir tué la mère (littéralement: "derrière la mère, après la mère"), il est parti, à ce que dit l'histoire! La fille… qu'est-ce qu'elle a couru[, à la poursuite du tigre qui emportait sa mère]!


NOTE : /lɑ˧ | qʰɑ˩ne˩˥ | bæ˧˥/: réalisation intonative assez éloignée de la séquence tonale, avec pour résultat que /bæ/ paraît plus bas que ce à quoi on s'attendrait d'après son ton lexical.
S85 stop écouter
lɑ˧ | qʰɑ˩ne˩˥ | bæ˧˥! | <ə˧mi˧-lɑ˧ | mv̩˩˥, | əəə…> mv̩˩˥ | ʈʂʰɯ˧ne˧-ʝi˥ | bæ˧-ɲi˥-pi˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!

Le tigre, qu'est-ce qu'il a couru! <La mère et la fille, euh…> La fille, qu'est-ce qu'elle a couru[, à la poursuite du tigre qui emportait sa mère]!

S86 stop écouter
lɑ˧-ʈʂʰɯ˧-ɳɯ˩, | ə˧mi˧-ʁæ˧ʈv̩˥ | tʰi˧-ʈʰæ˧˥ ◊ -tɕɯ˩-zo˩, | ɖɯ˧-ʈɤ˧, | ɖɯ˧-ʈɤ˧, | ɖɯ˧-ʈɤ˧-ɳɯ˧ | po˧-hɯ˥! |

Le tigre, il serrait dans ses mâchoires le cou de la mère; il l'emmenait, la tirant, tirant et tirant encore!


NOTE : wwww à reporter ds discussion des composés: il en apparaît bien dans les textes. 'cou de mère'
S87 stop écouter
lo˧qo˧-mv̩˧ | po˧-hɯ˥! | mv̩˩˥ F | lo˧qo˧ kʰi˧-ɲi˥-pi˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!

Il l'emportait vers le bas, dans la vallée! [Alors] la fille, elle aussi, est allée dans la vallée!

S88 stop écouter
lo˧qo˧ kʰi˧˥ ◊ -dʑo˩, | tʰi˩˥, | qʰɑ˩ne˩ ʝi˥-zo˩ | qʰɑ˩ne˩˥ | gɤ˩-tʰv̩˧, | mɤ˧-do˩-zo˩! | mv̩˩˥, | le˧-ŋv̩˩, | le˧-ŋv̩˩, | le˧-ŋv̩˩-dʑo˩-tsɯ˩! |

Comme elle s'enfonçait dans la vallée, comment donc, comment s'est-elle trouvée à remonter les pentes, on ne sait pas! La fille, on dit qu'elle pleurait, qu'elle pleurait sans cesse[, pendant tout ce périple]! (Explication: la fille suit le tigre en direction du fond de la vallée; et pourtant, dans son égarement, elle finit par revenir à la maison de sa grand-mère et son grand-oncle, qui se trouve en montagne. Mais dans la suite du récit, la narratrice revient sur ce point: au lieu de faire arriver la jeune fille chez ses grand-parents "on ne sait comment", comme c'est le cas dans la première version du récit, elle fait ici intervenir la mère de la jeune fille, qui vient lui conseiller d'abandonner la poursuite et de reprendre le chemin du retour.)

S89 stop écouter
le˧-wo˧-tʰo˥-tɕo˩, | ə˧mi˧-ɳɯ˧, | əəə… ʐwɤ˩-ni˩˥ ◊ -zo˩: | "njɤ˧ mv̩˩! | no˧ | le˧-wo˧-hõ˧ F ! | no˧ | ŋv̩˩-mɤ˩-zo˩˥!" | pi˧-ni˩-zo˩. |

Ensuite, la mère… euh… c'est comme si elle avait parlé à sa fille / Ensuite, la fille a entendu comme la voix de sa mère qui lui parlait: "Ma fille! Retourne-t-en! Tu ne dois pas pleurer!"


NOTE : le˧-wo˧-tʰo˥-tɕo˩ veut dire littéralement 'se retourner'; ici, l'expression a le sens de 'ensuite, après'.
S90 stop écouter
le˧-wo˧-tʰo˥-tɕo˩-tɕɯ˩-dʑo˩, | gɤ˧bi˧ | qo˩qɑ˩˥ | ɖɯ˧-ɭɯ˧-qo˧ tʰv̩˧ | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |

Alors la jeune fille, se retournant, est remontée jusqu'à un col, à ce qu'on dit.

S91 stop écouter
tʰi˩˥, | qo˩qɑ˩˥ | ɖɯ˧-ɭɯ˧-qo˧ tʰv̩˧-dʑo˧, | tʰi˧-hĩ˧-zo˥! | "ə˧mi˧! | njɤ˧-ə˧mɑ˧! | njɤ˧ | qʰɑ˩ne˩˥ | ɖɯ˧-zɯ˧ bv̩˩-ʝi˩?" |

Parvenue au col, elle s'est tenue debout! "Hélas! Maman! Comment vais-je [continuer à] vivre?

S92 stop écouter
əəə… no˧ | lɑ˧ | le˧-tsʰɯ˩; | no˧… <l… ə˧zɯ˩…> lɑ˧ | le˧-ʈʰæ˧-po˥-hɯ˩-ze˩! |

"Le tigre est venu [te dévorer]; <nous deux…> le tigre t'a emportée pour te dévorer!"

S93 stop écouter
"njɤ˧ | qʰɑ˩ne˩ ʝi˥-kʰɯ˩-bi˩?"

"Que vais-je devenir?"

S94 stop écouter
"njɤ˧ | ə˧ʑi˧-lɑ˥ | ə˧pʰv̩˧-ki˧ | qʰɑ˩ne˩˥ | tʰi˧-ʐwɤ˩-bi˩?"

"Que vais-je donc pouvoir dire à grand-mère et grand-oncle?"


NOTE : tons vérifiés, pour toute la séquence /njɤ˧ | ə˧ʑi˧-lɑ˥ | ə˧pʰv̩˧-ki˧ | qʰɑ˩ne˩˥ | tʰi˧-ʐwɤ˩-bi˩/
S95 stop écouter
"no˧ | njɤ˧ le˧-ʂv̩˧-jo˧!" | pi˧-zo˩, | mv̩˩zo˩-ɳɯ˥ | ɖɯ˧-njɤ˧ | ŋv̩˩-ɲi˥-pi˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!

"Viens t'occuper de moi!" Disant cela, la jeune fille pleurait sans cesse!

S96 stop écouter
le˧-ŋv̩˩, | le˧-ŋv̩˩-dʑo˩ | tʰi˩˥, | le˧-ŋv̩˩-se˩-dʑo˩, | mv̩˩zo˩˥ | tʰi˧-ʑi˧-ze˥-pi˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!

A force de pleurer, quand elle a eu fini de pleurer, la jeune fille s'est endormie, à ce qu'on raconte!

S97 stop écouter
tʰi˧-ʑi˧ŋv̩˥-dʑo˩, | ə˧tso˧, | ɖɯ˧-v̩˧-ɳɯ˧ | gɤ˩-tɕʰɯ˧-ni˧˥ ◊ -zo˩, | tʰi˩˥, | ə˧mi˧-qv̩˧ʈʂæ˧ mv̩˥ | le˧-po˧-tsʰɯ˧-zo˥; | ə˧mi˧-ɳɯ˧: |

Alors qu'elle rêvait, alors quoi… c'est comme si quelqu'un s'était levé, et c'est comme si elle entendait la voix de sa mère; sa mère lui disait:


NOTE : vérifié: est /ə˧mi˧-qv̩˧ʈʂæ˧ mv̩˥ | le˧-po˧-tsʰɯ˧-zo˥/, non /…-ze˥/
NOTE : dans /ə˧mi˧-qv̩˧ʈʂæ˧ mv̩˥/, la dernière syllabe est le verbe 'comprendre'.
S98 stop écouter
"njɤ˧ mv̩˩! | no˧ | ə˧ʑi˧-lɑ˥ | ə˧pʰv̩˧-ki˧ | le-bi˩-tsæ˩-ɲi˩! | ɖwæ˩-mɤ˧-zo˧-wɤ˧!" | pi˧-ni˩-zo˩, |

"Ma fille! Il faut que tu retournes chez grand-mère et grand-oncle! Sois sans crainte!"


NOTE : présence de la particule finale /wɤ/ confirmée
NOTE : avant 2013: noté /‡ɖwæ˩-mɤ˧-zo˧-wɤ˩/
S99 stop écouter
<gɤ˩-tɕʰɯ˧-dʑo˩…> gɤ˩-ʈi˧, | gɤ˩-ʈʂʰwæ˧-tɕɯ˥-dʑo˩-tsɯ˩, | ə˧mi˧ | ɖɯ˧-do˩-ki˩-zo˩! |

en se levant… en se réveillant, c'est comme si elle avait vu sa mère!


NOTE : vérifié: est /ɖɯ˧-do˩-ki˩-zo˩/, pas de syllabe entre /do˩/ et /ki˩/.
S100 stop écouter
tʰi˩˥, | əəə… ə˧mi˧ | ɖɯ˧-do˩-ki˩-dʑo˩ | tʰi˩˥, | wɤ˩˥, | ə˧mi˧ | le˧-tɕʰɯ˧˥ ◊ -tɕɯ˩-hɯ˩-zo˩! |

Elle avait revu sa mère; et elle l'avait perdue à nouveau! (=Dans son rêve, elle avait retrouvé sa mère; et au réveil, elle l'avait à nouveau perdue!)

S101 stop écouter
tʰi˩˥, | mv̩˩˥ | le˧-ŋv̩˩, | le˧-ŋv̩˩ | le˧-kʰi˧˥ ◊ -dʑo˩, | ʐɤ˩mi˩-qo˥ | ɖɯ˧-v̩˧ ʁo˧pv̩˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!

Alors, la fille pleurait, pleurait, en allant son chemin; en chemin, elle a rencontré quelqu'un!

S102 stop écouter
"no˧ | ə˧tse˧-ʝi˧ | ŋv̩˩-ɲi˥? | ɲi˩˥ | mv̩˩zo˩ ɲi˥? | ə˧tse˧-ʝi˧-ɲi˥ | no˧-tɑ˧kɤ˥ | le˧-tsʰɯ˩?" |

"Pourquoi pleures-tu? De qui es-tu la fille? Comment se fait-il que tu parviennes ici toute seule?"

S103 stop écouter
"dʑɯ˩nɑ˩mi˩˥ | ʈʂʰɯ˧-ʂwæ˧~ʂwæ˧-hĩ˧-qo˩, | ə˧tse˧ ʝi˧ | no˧-tɑ˧kɤ˥ | se˧-ɲi˥?" | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |

"Comment se fait-il que tu marches seule, aussi haut sur la montagne?" lui a dit cette personne.

S104 stop écouter
tʰi˩˥, | ʈʂʰɯ˧-v̩˧-bi˥ | tʰi˧-tv̩˧~tv̩˧-zo˥: |

Alors, [la jeune fille] s'est jetée dans les bras de cette personne-là,

S105 stop écouter
"ə˧v̩˧˥ F ! | njɤ˧, əəə… | ə˧mɑ˧, | njɤ˧zɯ˩-dʑo˩, | ə˧ʑi˧-lɑ˥ | ə˧pʰv̩˧-ki˧ | le˧-bi˩-pi˩, | le˧-tsʰɯ˩-dʑo˩;" |

"Oncle! Moi… ma mère, elle et moi… [elle m'a] dit de retourner auprès de grand-mère et grand-oncle, alors je m'en retourne!

S106 stop écouter
"ə˧hwɤ˧, | lɑ˧-ɳɯ˧ | njɤ˧ ə˧mɑ˧ | le˧-ʈʰæ˧-ze˥!" |

"Hier soir, le tigre a dévoré ma mère!"

S107 stop écouter
"əəə… njɤ˧ F | ɖɯ˧-ʈʰæ˧-pi˥, | lɑ˧-gi˧˥ | le˧-bæ˧˥ ◊ -kʰi˩! | njɤ˧ | mɤ˧-ʈʰæ˧˥!" |

"[Je lui] ai dit de me manger [aussi], j'ai couru derrière le tigre! (littéralement: "en direction du tigre") [Mais le tigre] ne m'a pas mangée!

S108 stop écouter
"njɤ˧ | ə˧mɑ˧ | le˧-ʈʰæ˧-po˧-hɯ˥-ze˩!" | pi˧-zo˩, | ŋv̩˩-ɲi˥-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!

"Il a mordu ma mère, et l'a emportée!" a-t-elle dit; et elle a pleuré!

S109 stop écouter
ŋv̩˩˥, | ŋv̩˩-dʑo˥ | tʰi˩˥, | əəə… zo˩no˥, | əəə… pʰæ˧tɕi˥ tʰv̩˩-v̩˩ | ʁo˧pv̩˩, ə˧v̩˧ tʰv̩˧-v̩˧-ɳɯ˩: |

En pleurant… elle avait rencontré ce jeune homme en chemin; cet oncle, il a dit:


NOTE : /ə˧v̩˧ tʰv̩˧-v̩˧-ɳɯ˩/: tons vérifiés; est: /ə˧v̩˧ tʰv̩˧-v̩˧/, portant un ton lexical #H (avec la copule: /ə˧v̩˧ tʰv̩˧-v̩˧ ɲi˥/).
S110 stop écouter
"mv̩˩zo˩˥! | no˧ | ɖwæ˩-mɤ˧-zo˧-wɤ˧! | æ˧ʂæ˧-tɑ˩mv̩˩ | dʑo˧-ɲi˥!" |

"Jeune fille, tu ne dois pas te faire de souci! Les légendes nous en parlent[, de cette situation]!"


NOTE : /mv̩˩zo˩˥/: réalisé comme [mv̩˩zo˩ɑ˥], modification expressive, du fait de l'intonation vocative.
S111 stop écouter
"əəə… 'lɑ˧ do˩, ə˩dɑ˩ ʂɯ˩! | ʐæ˩ do˥, ə˩mi˩ ʂɯ˩!' | pi˧. |

"On dit que 'Si vous voyez le léopard, c'est que votre mère va mourir! Si vous voyez le tigre, c'est que votre père va mourir!' "

S112 stop écouter
"ʐæ˩˥ ◊ -dʑo˩, | ə˧mi˧ ʈʰæ˧-kv̩˥! | lɑ˧-dʑo˧, | ə˧dɑ˥ ʈʰæ˩-kv̩˩! | no˧ | ɖwæ˩-mɤ˧-zo˧!" |

"Le léopard, il peut dévorer notre mère! Le tigre, dévorer notre père! Il ne faut pas que tu te fasses de souci!"

S113 stop écouter
"<no˧… | ə˧zɯ˩…> | hĩ˧-ʈʂʰɯ˧-dʑo˩, | ə˧dɑ˧-ə˧mi˧, | no˧-sɯ˩kv̩˩ | zɯ˧ pv̩˩-mɤ˩-kv̩˩!" |

"Les êtres humains, [tel est leur destin:] père et mère ne peuvent pas vous accompagner toute votre vie!"

S114 stop écouter
no˧ | ə˧mi˧-ʈʂʰɯ˧-dʑo˩, | ʈʂʰæ˩~ʈʂʰæ˩-qo˥-ɳɯ˩, | zo˩no˥… | lɑ˧-ɳɯ˧ | <ʈʂʰæ˧-zo˥> ʈʰæ˧-zo˧-ʝi˧-zo˥, | zo˩no˥, | hĩ˧-ʈʂʰɯ˧, | əəə… <le˧-dʑo˩-ɲi˩-ʝi˩> [dʑo˧-hĩ˧ ɲi˥-ʝi˩]! |

"Ta mère, dans la succession des générations, eh bien… le tigre devait la manger; il fallait qu'il en soit ainsi!"


NOTE : wwww intéressant pr étude rétroflexes: ici, confusion entre les deux; qui sont phonétiquement très proches. Peut-être dû en partie à la proximité de la syllabe rédupliquée /ʈʂʰæ/ dans la même phrase.
NOTE : intéressant: construction V-zo˧-ʝi˧-zo˧; est phonétiquement réduite, et ressemble à [ʈʰæ˧-zo˧-zo˥], avec seulement un allongement de la première occurrence de /zo/.
S115 stop écouter
"tɕi˧wɤ˧-ɳɯ˩, | ʈʂʰɯ˧ne˧ gv̩˧-ɲi˥-ʝi˩!" |

"Le cycle des réincarnations (littéralement "la réincarnation"), voilà comment cela se déroule!"

S116 stop écouter
"no˧ | ə˧mi˧-ki˧ | se˧pʰɤ˧ ʝi˧-mɤ˧-zo˧-ze˩!" |

"Il ne faut plus te faire de chagrin pour ta mère!"


NOTE : /se˧pʰɤ˧/: réalisé [‡se˧bɤ˧], par une légère maladresse de prononciation.
S117 stop écouter
"no˧˥ | tʰv̩˧-se˩-gɤ˩ | no˧ | ə˧mi˧-ɳɯ˧ | tʰi˧-ʁo˥ʐv̩˩-dʑo˩-ʝi˩!" |

"Ainsi, désormais, ta mère te protègera [depuis l'autre monde]!"

S118 stop écouter
"no˧ | õ˧-bv̩˥-õ˩ | ə˧ʑi˧-lɑ˥ | ə˧pʰv̩˧-ki˧ | le˧-hõ˩!" | pi˧-zo˩ | tʰi˩˥, | əəə… le˧-hɯ˩-ɲi˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!

Comme il lui disait: "Retourne-t-en seule auprès de [ta] grand-mère et [ton] grand-oncle!", eh bien, elle s'en est retournée [auprès d'eux] (=elle a repris son chemin vers la demeure de sa grand-mère et son grand-oncle)!

S119 stop écouter
le˧-hɯ˩-dʑo˩ | tʰi˩˥, | ɑ˩ʁo˧ tʰi˧-tʰv̩˧-dʑo˧, | ə˧pʰv̩˧-lɑ˧ | ə˧ʑi˧-ki˥ | ʈʂʰɯ˧ne˧-ʝi˥ | le˧-ʐwɤ˩, | le˧-ʐwɤ˩, | le˧-ʐwɤ˩-dʑo˩, | ə˧ʑi˧-lɑ˥ | ə˧pʰv̩˧-ɳɯ˧: |

Ayant repris son chemin, quand elle est parvenue à la maison [de sa grand-mère et son grand-oncle], comme elle racontait ainsi [tout ce qui s'était passé], sa grand-mère et son grand-oncle ont dit:


NOTE : tons de /ɑ˩ʁo˧ tʰi˧-tʰv̩˧-dʑo˧/ vérifiés
S120 stop écouter
"<njɤ˧…> | njɤ˧ mv̩˩-ɲi˩! | njɤ˧ | ŋv̩˩˥ | mɤ˧-bi˧-ze˧!" |

"Moi… tu es ma fille! Je ne vais pas pleurer [mais me réjouir de ta présence à toi, revenue de ce grand danger]!"

S121 stop écouter
"njɤ˧ kwɤ˧ɭɯ˩! | njɤ˧ ʐv̩˧mi˧! | no˧ | ɖwæ˩-mɤ˧-zo˧!" |

"Mon trésor! Ma petite-fille! Il ne faut pas avoir de peine!"

S122 stop écouter
"ə˧mi˧ ʈʰæ˧˥, | tʰi˧-ʈʰæ˧-kʰɯ˥!" |

"[Le tigre] a dévoré [ta] mère; eh bien, qu'il en soit ainsi!" (littéralement: "laissons[-le la] dévorer!")

S123 stop écouter
"ə˩sɯ˧kv̩˥, | ʈʂʰæ˩~ʈʂʰæ˩˥ | kɤ˧wɤ˧-ljɤ˧-ɳɯ˥ | tʰi˧-dʑo˧-ɲi˥-ʝi˩!" |

"Nous… C'est inscrit dans la succession des générations!"

S124 stop écouter
əəə… "se˧pʰɤ˧… <se˧bɤ˧> ʝi˧-mɤ˧-zo˧-ze˩!" | pi˧-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩. |

Euh… "Il ne faut pas que tu gardes ça sur le cœur!" lui ont-ils dit.

S125 stop écouter
tʰi˩˥, | mv̩˩zo˩˥ | tʰv̩˧qo˧ tʰv̩˧-dʑo˧ | tʰi˩˥, | ə˧ʑi˧-lɑ˥ | ə˧pʰv̩˧-ki˧ | ɖɯ˧-so˩ hɑ̃˩ | tʰi˧-dzi˩. |

La jeune fille, parvenue à cet endroit (=chez eux), a habité quelques jours chez sa grand-mère et son grand-oncle.


NOTE : tons de /tʰv̩˧qo˧ tʰv̩˧-dʑo˧/ vérifiés
S126 stop écouter
le˧-wo˥ | wɤ˩˥ | ɬi˧di˩ | le˧-tsʰɯ˩-dʑo˩, | tʰi˩˥, | gi˩˥, | gi˩˥, | gi˩˥ ◊ -dʑo˩, | mmm…

Quand, par la suite, elle est retournée à Yongning,

S127 stop écouter
"ə˧mi˧! | õ˧˥, | qʰɑ˩ne˩˥ | õ˧-zɯ˧ bv̩˥-tso˩-ɲi˩? | õ˧-ə˧mi˥ F | lɑ˧-ɳɯ˧ | le˧-ʈʰæ˧-ɲi˥!"

"Hélas! Comment vais-je passer ma vie, seule (littéralement "moi-même")?"


NOTE : vérifié: est ici /le˧-ʈʰæ˧-ɲi˥/, non /le˧-ʈʰæ˧˥ ◊ -ɲi˩/.
S128 stop écouter
"ɖɯ˧-zɯ˧ | qʰwæ˧kʰwɤ˧ tsɤ˧-ze˩!" | pi˧-zo˩, | tɕʰɤ˧ɲi˧ni˧˥ | ŋv̩˩-ɲi˥-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩!

"Je vais être l'objet de racontars pendant toute ma vie!" s'est-elle dit. Elle pleurait à longueur de journée!

S129 stop écouter
ŋv̩˩˥, | ŋv̩˩˥ ◊ -dʑo˩ | tʰi˩˥, | ɖɯ˧-ɲi˧-ɻ̍˧-dʑo˩, | ə˧mi˧-ɳɯ˧, | ə˧tso˧, | ʁo˧tʰo˩ hĩ˩-tsʰɯ˩-ni˩! | "njɤ˧ mv̩˩! | tʰɑ˧-ŋv̩˩!" |

Comme elle pleurait encore et encore, un jour, sa mère, quoi… c'est comme si elle se tenait debout derrière elle! "Ma fille! Ne pleure pas!"

S130 stop écouter
əəə… "ʈʂʰæ˩~ʈʂʰæ˩˥ | kɤ˧wɤ˧-ljɤ˧ɳɯ˥, | ə˧mi˧ le˧-ʈʰæ˧˥, | ɖɯ˩lo˧ dʑo˧-ɲi˥-ʝi˩-ze˩!" |

"Dans la succession des générations, que [le tigre] dévore [ta] mère (=la personne la plus âgée), c'est conforme à l'ordre des choses!"

S131 stop écouter
"no˧ | õ˧-bv̩˥-õ˩ | zo˧ ʐɤ˧-tso˧-ɲi˥, | mv̩˩ ʐɤ˩-tso˥-ɲi˩!" |

"Maintenant c'est à toi d'élever des fils, d'élever des filles!" (littéralement: "Tu dois toi-même élever des fils, élever des filles")

S132 stop écouter
"ə˧mi˧-ɳɯ˧ | no˧ qɑ˧~qɑ˥-bi˩! | no˧ | ɖwæ˩-mɤ˧-zo˧!" | pi˧-zo˩. |

"Maman va t'aider! Ne te fais pas de souci!" dit-elle.


NOTE : tons de /no˧ qɑ˧~qɑ˥-bi˩/ vérifiés; ressemble à /‡no˧ qɑ˧~qɑ˧-bi˥/, du fait de facteurs intonatifs.
S133 stop écouter
tʰv̩˧-ɲi˧-ɳɯ˩, | ɖɯ˧-ʈʂʰwæ˧-ɳɯ˧ | ʈʂʰwæ˧ F -tɕɯ˧-kʰɯ˥-zo˩, |

A partir de ce jour-là, [la jeune fille] a retrouvé ses esprits, comme si elle s'éveillait d'un coup!


NOTE : de: /ʈʂʰwæ˧-tɕɯ˧˥/ 's'éveiller, reprendre ses esprits'; fort allongement de /ʈʂʰwæ˧/ dans /ʈʂʰwæ˧ F -tɕɯ˧/
S134 stop écouter
ə˧mi˧ | le˧-mv̩˩-pʰæ˩-tɕɯ˩-kv̩˩-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩! | ə˧mi˧-ɳɯ˧! |

Elle a oublié sa mère/elle a tourné la page!


NOTE : Ajout de /ə˧mi˧-ɳɯ˧/: façon de rappeler le thème que la jeune fille parvient à oublier/mettre de côté.
S135 stop écouter
õ˧-bv̩˥-õ˩ | tʰi˩˥, | ə˧tso˧-mɤ˧-ɲi˩, | le˧-ʝi˥, | tʰv̩˧-tsɯ˧˥ ◊ -mv̩˩! |

Elle a elle-même repris les choses en main, et s'est bien débrouillée en toutes choses! (littéralement: "Elle a tout fait elle-même; et elle y est parvenue!")

S136 stop écouter
tʰi˩˥, | zo˩no˥, | əəə… zo˧mv̩˥-lɑ˩ | le˧-ʐɤ˧-tʰv̩˧! | ʑi˧qʰwɤ˧-lɑ˧ | le˧-tsʰi˧-tʰv̩˧! | əəə… mv̩˧di˧-lɑ˥, | le˧-pæ˧˥ ◊ -tʰv̩˩! | ɖʐe˧-lɑ˧ | dʑo˧-tsɯ˧˥ ◊ -mv̩˩!

Alors, euh… Les enfants, elle est parvenue à en élever! Une maison, elle est parvenue à la construire! La terre, elle est parvenue à la mettre en culture! L'argent, elle en a eu (=elle est parvenue à en gagner)!


NOTE : tons vérifiés; ressemble phonétiquement à [‡le˧-ʐɤ˧-tʰv̩˩], effet de l'intonation affirmative.
S137 stop écouter
tʰi˩˥, | æ˧ʂæ˧-dʑo˩, | tɕo˧˥ʂɯ˩, | ə˧mi˧-ɳɯ˧… | "ə˧mi˧ | le˧-ʂɯ˧-bi˧, | ɖwæ˩-mɤ˧-zo˧! | ə˧mi˧-ɳɯ˧ | qɑ˧-kv̩˥!" | pi˧. |

Autrefois, eh bien, la mère… On disait: "La mère va mourir; [mais] il ne faut pas avoir de craintes [à ce sujet!] [Même après sa mort,] la mère aide [encore ses enfants, depuis l'autre monde]!"

S138 stop écouter
zo˩no˥, | æ˧ʂæ˧-tɑ˩mv̩˩ | <ʈʂʰɯ˧…> ʈʂʰɯ˧ne˧-ʝi˥ | ɖɯ˧-kʰwɤ˥ | dʑo˧-ɲi˥-mæ˩! |

Autrefois, il y avait une légende comme ça!

S139 stop écouter
tʰi˩˥, | mv̩˩zo˩ tʰv̩˩-ɭɯ˩˥, | ə˧mi˧-ɳɯ˧… | ə˧mi˧-dʑo˥ | le˧-ʂɯ˧-dʑo˥ | tʰi˩˥, | ə˧tso˧ ʝi˧-ɻ̍˩, | ə˧tso˧ tʰv̩˧! |

Alors, cette jeune femme, grâce à sa mère… quand sa mère a été morte, à quoi que s'essaie [la jeune femme], elle parvenait à tout/ tout lui réussissait!


NOTE : d'abord noté /‡mv̩˩zo˩ tʰv̩˩-ɭɯ˥/
S140 stop écouter
lo˧ ʝi˧ F | lo˧-tʰv̩˧! | ɖʐe˧ ʂe˧ F | ɖʐe˧ ɖɯ˧! | go˩bo˧ ʐɤ˩ F | go˩bo˧ dʑɤ˩-kʰɯ˩! |

Quand elle faisait un travail, elle réussissait/elle y parvenait sans difficulté! Quand elle élevait du bétail, il prospérait!

S141 stop écouter
õ˧-ʈʂʰɯ˧ne˧-ʝi˥ ◊ -zo˩! | ə˧mi˧-ɳɯ˧ qɑ˧˥, | tʰi˩˥, | mv̩˩zo˩ tʰv̩˩-ɭɯ˩˥ ◊ -dʑo˩, | ə˧tso˧-mɤ˧-ɲi˩, | ɖwæ˧˥ | … dʑo˧-zo˩! | hɤ˩-tsɯ˩˥ ◊ -mv̩˩! |

Voilà comment c'était! Avec l'aide de sa mère, eh bien, cette jeune femme, toutes les choses, elle en a eu beaucoup! C'était bien [ainsi]/ tout allait pour le mieux!


NOTE : tons de /hɤ˩-tsɯ˩˥/ vérifiés. Tons réguliers
S142 stop écouter
tʰi˩˥, | hĩ˧=ɻæ˧-ɳɯ˥: | "ə˧mi˧! | ʈʂʰɯ˧, | ʈʂʰɯ˧ne˧ gv̩˧-ɲi˥-tsɯ˩-dʑo˩! | ʈʂʰɯ˧ | ʈʂʰɯ˧ne˧ ʝi˥… | ə˧tse˧ ʝi˧-zo˥ | ʈʂʰɯ˧ne˧-ʝi˥ | dʑo˧-ɲi˥-hɯ˩ F ? | pi˧. |

Les gens disaient: "EEeeeh bien! Elle, voici ce qui lui est arrivé! Qu'elle ait tous ces succès (littéralement "Qu'elle fasse ainsi")… comment se fait-il qu'elle ait si bonne fortune (littéralement "qu'elle ait autant [de choses/de richesses]")?

S143 stop écouter
mv̩˩zo˩-ɳɯ˥: | "njɤ˧ | ə˧mɑ˧-ɳɯ˧ | njɤ˧-ki˧ | ʈʂʰɯ˧ne˧-ʝi˥ | ʐwɤ˩-dʑɯ˩˥ ◊ -ɲi˩: | mmm… 'ə˧dɑ˧-ə˧mi˧-dʑo˩, õ˧-zɯ˧ pv̩˥-mɤ˩-kv̩˩! | õ˧˥ | tʰi˧-dʑo˩-hĩ˩-dʑo˩, | <ʂɯ˧-bi˧-dʑo˧, sɯ.gɯ…> le˧-ʂɯ˧-hĩ˧-gi˩-dʑo˩, | le˧-sɯ˩-hĩ˩, | bi˧-hĩ˩-mɤ˩-kv̩˩!' |"

La jeune femme leur a répondu: "Voici ce que m'a dit ma mère, par le passé: 'Son père et sa mère, on ne peut les garder auprès de soi toute sa vie; celui qui reste [après leur mort] (=leur enfant), celui qui est vivant, il ne doit pas songer à les accompagner dans la mort! (littéralement: "dans la direction de ceux qui sont morts, celui qui est vivant, il ne faut pas qu'il y aille")


NOTE : On pourrait également dire, au lieu de /bi˧-hĩ˩-mɤ˩-kv̩˩/: /bi˧-mɤ˧-hĩ˩/
S144 stop écouter
"õ˧˥ | ə˧tso˧ ʝi˧-tʰɑ˩, | le˧-ʝi˥-tsɯ˩-zo˩; | njɤ˧ | ə˧mɑ˧-ɳɯ˧, | njɤ˧-ʁo˧tʰo˩-ɳɯ˩, | ʈʂʰɯ˧ne˧-ʝi˥ | ɖɯ˧-kʰwɤ˧ ʐwɤ˧-zo˥! | njɤ˧ | ɬi˧qʰv̩˧-qo˩ | mv̩˧-zo˩! |

"Ce qu'on peut faire soi-même, il faut le faire; ma mère, de derrière moi (=à mon oreille), voilà le conseil qu'elle m'a donné! Je l'ai entendu au creux de mon oreille!"


NOTE : on pourrait également dire: /õ˧˥ | ə˧tso˧ ʝi˧-tʰɑ˩, | le˧-ʝi˥-zo˩/
NOTE : tons de /njɤ˧ | ɬi˧qʰv̩˧-qo˩ | mv̩˧-zo˩/ vérifiés
S145 stop écouter
"njɤ˧ | tʰv̩˧-ɲi˧-ɳɯ˩ | ə˧mɑ˧ | le˧-mv̩˩-pʰæ˩!"

De ce jour-là, j'ai cessé d'être obnubilée par le souvenir de ma mère! (littéralement: "j'ai oublié ma mère")

S146 stop écouter
"ə˧tso˧ ʝi˧-ɻ̍˩, | ə˧tso˧ ʝi˧-tʰv̩˧! | njɤ˧ | ə˧mɑ˧-ɳɯ˧ | ʁo˧ʐv̩˩ F -di˩!" | pi˧-zo˩ | tʰi˩˥, |

"Tout ce que j'ai fait m'a réussi! Ma mère est là qui me bénit et me protège [depuis l'au-delà]!"

S147 stop écouter
mmm… õ˧tʰv̩˧-ɲi˧-ɳɯ˩ | tʰi˩˥, | ʈʂʰɯ˧ | mv̩˩zo˩ tʰv̩˩-ɭɯ˩˥ ◊ -dʑo˩, | ɖʐe˧-lɑ˧ | le˧-dʑo˧, | ʁwɤ˧-lɑ˧ | le˧-dʑo˧! | zo˧mv̩˥-lɑ˩ | le˧-dʑo˩! | ʑi˧qʰwɤ˧-lɑ˧ le˧-dʑo˧! | go˩bo˧-lɑ˩ | le˧-dʑo˧-zo˩ | tʰi˩˥, | æ˧ʂæ˧-qʰwɤ˧-ʈʂʰɯ˧, | ʈʂʰɯ˧ne˧-ʝi˥ | ɖɯ˧-kʰwɤ˥ | dʑo˧-ɲi˥-tsɯ˩ ◊ -mv̩˩! | æ˧ʂæ˧, | ʈʂʰɯ˧ne˧-ʝi˥ | pi˧-kv̩˩! |

A partir de ce jour-là, cette jeune femme, elle a eu de l'argent, elle a eu argent et richesse! Elle a eu des enfants! Elle a eu une maison! Elle a eu du bétail! Alors… Les contes, il y en a un comme ça! / Voilà ce qu'on racontait autrefois! Voilà ce qu'on disait autrefois!


NOTE : /ɖʐe˧-lɑ˧ | le˧-dʑo˧, | ʁwɤ˧-lɑ˧ | le˧-dʑo˧/: les deux formules ont le même sens: 'elle a eu de l'argent et des richesses'; cf le disyllabe /ɖʐe˧ʁwɤ˧/ 'argent'. Le monosyllabe /ʁwɤ/ pour 'argent' ne peut être employé seul.
NOTE : tons de /zo˧mv̩˥-lɑ˩ | le˧-dʑo˩/ vérifiés; aussi les tons du reste de cette phrase.